
हाइलाइट्स
वानरराज बाली किष्किंधा का राजा था और सुग्रीव का बड़ा भाई था.
उसने ब्रह्म देव के वरदान के कारण लंका के राजा रावण को हराया था.
रामायण में बाली का वर्णन है. वानरराज बाली किष्किंधा का राजा था और सुग्रीव का बड़ा भाई था. बालि को वरदान प्राप्त था कि उसके सामने जो भी यद्ध के लिए आएगा, उसका आधा बल बाली को प्राप्त हो जाएगा. उसने इस वरदान के कारण ही लंका के राजा रावण को हराया था और बड़े-बड़े राक्षसों को यमलोक पहुंचा दिया था. अपने बल के घमंड में चूर बाली ने एक बार वीर हनुमान को युद्ध की चुनौती दे डाली. लेकिन उसे परिणाम का अंदाजा बिल्कुल भी न था. आइए जानते हैं कि बाली को वरदान कैसे मिला और हनुमान जी ने उसका घमंड कैसे तोड़ा.
इंद्र की माला और ब्रह्मा के वरदान से बाली बना अजेय
कथा के अनुसार, बाली ने अपने धर्म पिता इंद्र देव से एक सफेद माला प्राप्त की थी. साथ ही उसने अपनी तपस्या से ब्रह्म देव को प्रसन्न कर दिया था. तब ब्रह्म देव ने उसे वरदान दिया कि युद्ध के मैदान में जब भी कोई तुमसे लड़ने आएगा तो उसकी आधी शक्ति तुम्हें प्राप्त हो जाएगी. इस वरदान के कारण बाली युद्ध में अजेय हो गया था. उसे कोई हरा नहीं पाता था. दुश्मन की आधी शक्ति पाकर वह और भी शक्तिशाली हो जाता था.
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हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा
एक बार बाली अपने बल के घमंड में चूर होकर जंगल में जाकर पेड़-पौधों को उखाड़ने लगा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा. वहां हनुमान जी प्रभु राम की साधना में लीन थे. बालि के इस हरकत से उनकी साधना भंग हो रही थी. वे बालि के पास गए और ऐसा न करने को कहा. वह अपने बल के घमंड में हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा. हनुमान जी ने उसे अनदेखा कर दिया. लेकिन बालि ने प्रभु राम का नाम लेकर उनको युद्ध के लिए ललकारा, तब हनुमान ली ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली. युद्ध का दिन तय हो गया.
ब्रह्म देव ने किया हनुमान जी से निवेदन
युद्ध से पूर्व हनुमान जी के पास ब्रह्म देव प्रकट हुए. उन्होंने कहा कि आप रुद्रावतार हैं. आप में अपार शक्ति है. आप अपने बल का 10वां हिस्सा ही लेकर युद्ध करने जाएं और बाकी प्रभु राम के पास रख दें. युद्ध बाद उसे वापस ले लेना. हनुमान जी ब्रह्म देव की बात मान गए.
हनुमान जी से बाली का युद्ध
तय समय पर हनुमान जी युद्ध के लिए बाली के समक्ष पहुंच गए. वे प्रभु राम का नाम लेकर बाली के सामने खड़े हो गए. वरदान के अनुसार बाली के शरीर में हनुमान जी की शक्ति प्रवेश करने लगी. पहले बाली बहुत खुश हुआ क्योंकि उसके अंदर शक्ति बढ़ने लगी थी.
कुछ समय बाद उसे महसूस होने लगा कि उसके शरीर में क्षमता से अधिक शक्ति आ गई है और वह लगातार बढ रही है. वह उस शक्ति पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था. अब उसे लगने लगा कि उसका शरीर हनुमान जी की प्राप्त शक्ति से ही फट जाएगा.
चकनाचूर हो गया बाली का घमंड
तभी ब्रह्म देव प्रकट हुए और बालि से बोले कि तुम हनुमान से युद्ध करना चाहते थे. हनुमान रुद्रावतार और अतुलित बलशाली हैं. उनके पास अपार बल है, जिसकी कोई सीमा नहीं है, जिसे तुम नहीं संभाल सकते. वे तो अपनी शक्ति का 10वां हिस्सा लेकर ही आए हैं और तुम उस शक्ति का अभी आधा हिस्सा भी नहीं संभाल पा रहे हो. यदि वे पूरी शक्ति के साथ तुम्हारे पास आते तो तुम्हारा क्या होता. इस तरह से बाली बिना युद्ध किए ही हनुमान जी की शक्ति से परिचित हो गया.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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Tags: Dharma Aastha, Lord Hanuman, Ramayana
FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 11:21 IST








