
मो. सरफराज आलम/सहरसा. शिकार करने का शौक हर किसी को होता है, लेकिन यह एक दंडनीय अपराध भी है. शिकार करते पकड़े जाने पर उन पर सख्त कार्रवाई भी होती है और जेल भी जाना पड़ता है. लेकिन यह जानकर आप दंग रह जाएंगे कि अब मुखिया को शिकार करने का अधिकार प्राप्त होगा. यह आपको पंचायत स्तर पर जल्द देखने को मिलेगा. हालांकि इसके लिए कुछ नियम और शर्ते भी होगी, जिसका पालन करना हर हाल में अनिवार्य होगा.
आपके खेतों में घोड़परास या जंगली सूअर आतंक मचा रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसका समाधान वन विभाग ने निकाला है. इसको लेकर पंचायत के मुखिया को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. विभाग के इस निर्देश के बाद अब पंचायत के मुखिया को घोरपरास और जंगली सूअर को मारने का निर्देश दिया है, लेकिन इसके लिए भी एक प्रक्रिया है. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि विभाग द्वारा जारी निर्देश में क्या-क्या बताया गया है.
पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जारी की है अधिसूचना
दरअसल, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है. जिसमें बताया गया है कि घोड़परास तथा जंगली सूअर जो खेती या बागवानी तथा मनुष्यों के जानमाल के लिए खतरनाक हो चुके हैं, उसे मारने का आदेश जारी किया गया है. अधिनियम 1972 की धारा 4(1)(v) के अंतर्गत प्राधिकृत पदाधिकारी नियुक्त किया गया है. जिस इलाके में घोड़परास या जंगली सूअर के द्वारा खेतों में लगाए गए फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है तो किसान को इसकी शिकायत स्थानीय मुखिया से करनी होगी. मुखिया किसान की शिकायत का सत्यापन करने के लिए स्थल का निरीक्षण करेंगे और वन विभाग को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे. हालांकि अंतिम निर्णय मुखिया को ही लेना है.
किसानों की समस्या के मद्देनजर वन विभाग ने लिया है निर्णय
वन प्रमंडल पदाधिकारी रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि घोड़परास और जंगली सूअरों के आतंक से किसान परेशान रहते हैं. इसी समस्या के निदान के लिए वन विभाग ने यह निर्णय लिया है कि फसलों को बर्वाद करने वाले घोड़परास एवं जंगली सूअर को मार दिया जाएगा. लेकिन इसके लिए विभाग द्वारा जारी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा. पंचायत के मुखिया किसानों से मिले लिखित शिकायत पर हीं विचार करेंगे. लिखित शिकायत प्राप्त होने पर मुखिया गांव के अन्य बुजुर्गों के साथ प्रभावित किसान एवं स्थानीय वन उप परिसर पदाधिकारी या वन परिसर पदाधिकारी या वन क्षेत्र पदाधिकारी के साथ स्थल निरीक्षण करेंगे और वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उपरांत एक पंचनामा बनाएंगे. जिसके बाद घोड़परास व जंगली सूअर को मारना आवश्यक समझे जाने पर पंचनामा में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा.
जंगली सूअर या घोड़परास को मारने के लिए मुखिया को हीं देना है आदेश
वन प्रमंडल पदाधिकारी रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि मुखिया के द्वारा जंगली सुअर या घोड़परास को मारने का आदेश दिया जाएगा. अनुमति पत्र में आखेट किए जाने के वाले घोड़परास एवं जंगली सूअरों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख करते हुए उसकी प्रति संबंधित वन उप- परिसर पदाधिकारी या वन परिसर पदाधिकारी या वन क्षेत्र पदाधिकारी को दी जाएगी. इसके बाद मुखिया शूटर की सहायता लेंगे. उन्होंने आगे बताया कि मधेपुरा जिले में अब तक 13 घोड़परास और जंगली सूअर को मारा गया है. मधेपुरा जिला के 6 पंचायत में यह समस्या बनी हुई है. जहां देखा जाता है कि घोड़परास या जंगली सूअर के आतक से खेतों में लगाए गए फसल बर्बाद हो जाता है जिस वजह से किसान परेशान रहते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 10:16 IST








