
रवि पायक/ भीलवाड़ा. सूर्यदेव इस बार 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के बाद नौ दिन का नौतपा रहेगा. सूर्य देव 8 जून तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे. ऐसे में ज्येष्ठ मास में नौतपा की शुरुआत के नौ दिन सबसे अधिक गर्मी वाले होते है. इसके साथ ही नौतपा के भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो इसका दृष्टिकोण अलग है. हम आपको बताएंगे कि भौगोलिक और खगोल विज्ञान दृष्टि से नौतपा पूरा घटनाक्रम क्या रहता है.
शिवचरण माथुर गवर्नमेंट पीजी कॉलेज मांडलगढ़ के प्रोफेसर डॉक्टर सावन कुमार जांगिड़ ने कहा कि खगोल विज्ञान के अनुसार नौतपा के दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं. जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है. अगर नौतपा के सभी दिन पूरे तपें तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है.
वहीं दूसरी तरफ नगर व्यास प. कमलेश व्यास ने कहा कि बताया कि नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होना है यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है. चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं. जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं. जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं.
नौतपा का वैज्ञानिक आधार
नौतपा सिर्फ ज्योतिष में ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्व रखता है. इसके अनुसार, नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधी धरती पर पड़ती है. जिसके कारण तापमान सर्वाधिक होता है. तापमान बढ़ने से मैदानी इलाकों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है जो समुद्र की लहरों को अपने तरफ आकर्षित करता है इस कारण पृथ्वी के कई हिस्सों पर ठंडी हवाएं, तूफान और बारिश होने की संभावना होती है.
क्या करें और क्या न करें
नौतपा के दिनों में विवाह जैसी मांगलिक यात्रा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. ग्रहों की स्थिति को देखते हुए देश के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में प्राकृतिक आपदाएं पैदा हो रही हैं. यह नौतपा 02 जून तक चलेगा. नौतपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहता है सूर्य की मौजूदा स्थिति अशुभ फल दे सकती है वृष राशि वालों के लिए अहितकारी है.
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FIRST PUBLISHED : May 24, 2023, 22:04 IST








