इमरान को तोड़ने में जुटे फौज और आईएसआई, शुरू किया ‘ऑपरेशन बैकबोन’, समर्थक पर कराया आत्मघाती हमला

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हाइलाइट्स

3 दिन पहले जमात-ए-इस्लामी के अमीर सिराजुल हक के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ.
सिराज उल हक को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का बेहद नजदीकी माना जाता है.
इमरान के खास लोगों को फौज और आईएसआई ने संकेत दिया है कि खुद को अलग कर लें.

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोड़ने के लिए पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ऑपरेशन बैकबोन शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि इसी के तहत बलूचिस्तान में जमात-ए-इस्लामी के अमीर सिराजुल हक पर बिना नुकसान का आत्मघाती हमला कराया गया था. इस हमले की बाबत जो ताजा वीडियो सामने आया है उससे साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि आत्मघाती हमलावर का मकसद सिराजुल हक को मारना नहीं डराना था. क्योंकि इस आत्मघाती हमले में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. दूसरी तरफ आतंकवादी संगठनों ने इस हमले में हाथ होने से इनकार करते हुए इसकी निंदा की है. ध्यान रहे कि इमरान खान के साथ के नेता धीरे-धीरे उनका साथ छोड़ रहे हैं.

3 दिन पहले बलूचिस्तान में जमात-ए-इस्लामी के अमीर सिराजुल हक के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ. इस हमले की बाबत पाकिस्तानी सरकार और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने प्रचार किया कि हमला आतंकवादियों द्वारा किया गया था और इसका मकसद अमीर को नुकसान पहुंचाना था.

अब इस घटना का जो ताजा वीडियो सामने आया है उसमें साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि आत्मघाती हमलावर ने खुद को सिराज उल हक की कार से काफी पहले ही उड़ा लिया. जबकि वह चाहता तो बिल्कुल दरवाजे के समीप पहुंचकर विस्फोट कर सकता था. साथ ही आरंभिक तौर पर यह भी माना जा रहा है कि इस हमलावर के पास केवल इतना ही बारूद था जितना जिससे वह केवल खुद को नुकसान पहुंचा सकता था.

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इमरान खान के करीबी हैं सिराज उल हक
सिराज उल हक को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का नजदीकी माना जाता है. इसके पहले जब इमरान खान ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ लॉन्ग मार्च की घोषणा की थी तो उस समय सिराज उल हक ने सरकार और इमरान खान के बीच मध्यस्थता की और उनके प्रयासों से सरकार मान गई. सिराजुल हक इसके पहले भी कह चुके हैं कि उनकी पार्टी जमात-ए-इस्लामी लोकतंत्र को पटरी से नहीं उतरने देगी और राजनीतिक मतभेदों को छोड़कर लोकतंत्र को बचाया जाएगा.

खुफिया सूत्रों का मानना है कि इमरान खान के ऐसे समर्थकों को जिनकी आम जनता में खासी पकड़ है उन्हें तोड़ने के लिए पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी ने ऑपरेशन बैकबोन चलाया है. जिसके तहत इमरान खान से जुड़े हर महत्वपूर्ण नेता को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर धमकी दी जा रही है जिससे वो इमरान खान का साथ छोड़ दें. इस ऑपरेशन का खुलासा सिराज उल हक पर हुए आत्मघाती हमले का वीडियो सामने आने के बाद हुआ. जिसमें हमलावर को भेजने वाले का मकसद उन्हें मारने से ज्यादा डराना लग रहा है. दिलचस्प है कि तमाम आतंकवादी संगठनों ने बाकायदा आधिकारिक बयान जारी कर खुद को इस हमले से अलग कर लिया है.

तहरीक-ए-तालिबान ने कहा, हमसे लेना-देना नहीं
आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने बाकायदा एक बयान जारी कर इस हमले से खुद को अलग किया. साथ ही कहा कि जिसने भी यह हमला किया वह उसकी निंदा करता है और ऐसे नेताओं पर ऐसे हमले नहीं होने चाहिए. अलकायदा से जुड़े संगठन अलकायदा इंडियन कॉन्टिजेंट ने भी बाकायदा इस हमले की बाबत अधिकारिक बयान जारी किया और इस हमले से खुद को अलग करते हुए हमले की निंदा की.

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ध्यान रहे कि पिछले 2 दिनों के दौरान इमरान खान के कुछ खास साथी नेताओं ने खुद को अलग कर लिया है. साथ ही पिछले दिनों हुए कथित हिंसक प्रदर्शन की बाबत पूरी तरह से इमरान खान को जिम्मेदार बताया है. इसके पीछे बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी के कुछ आला लोगों ने इमरान खान के खास लोगों को संकेत दिया है कि यदि वे खुद को आर्मी एक्ट के तहत दर्ज हुए मुकदमे से बचाना चाहते हैं तो उन्हें इमरान खान का साथ छोड़ना होगा. आने वाले दिनों में इमरान खान के कुछ और खास लोग उनका साथ छोड़ सकते हैं.

Tags: Imran khan, Isi, Pakistan army, Pakistan news

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Author: Up Head Line

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