
मनमोहन सेजू/ बाड़मेर. कहते है कभी भी पहली असफलता पर कदम नहीं रोकने चाहिए क्योंकि क्या पता बहुत बड़ी सफलता अगले कदम पर इंतजार कर रही हो. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बाड़मेर के महज 22 साल के युवा ने. जिसने देश की सबसे कड़ी परीक्षा यूपीएससी को अपने दूसरे ही प्रयास में पास कर सफलता का परचम लहरा दिया है.
भारत-पाकिस्तान की सीमा पर बसे बाड़मेर में यूपीएससी परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद चंद्रप्रकाश के घर मे जश्न का माहौल है. 562वीं रैंक हासिल चन्द्रप्रकाश ने अपनी मेहनत का परचम लहरा दिया है. विकास अधिकारी पिता की आंखों की चमक देखते ही बनती नजर आ रही है. बाड़मेर के जटिया समाज में चन्द्र प्रकाश पहला युवा है जिसका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ है.
बाड़मेर के द मॉर्डन स्कूल में 10वीं और 12वीं करने के बाद से अपने लक्ष्य को साधने में जुट गए चंद्रप्रकाश ने साबित कर दिया है कि सफलता के लिए अनवरत मेहनत जरूरी है. बाड़मेर शहर के शास्त्री नगरी निवासी नरसिंगदास के बेटे चंद्रप्रकाश ने अपने दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर सफलता के झंडे गाड़ दिए है. पिता नरसिंग दास आडेल पंचायत समिति में विकास अधिकारी पद पर कार्यरत है और माता वरिष्ठ अध्यापक है.
चंद्रप्रकाश का कहना है कि दसवीं के बाद से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था. ग्रेजुएशन के साथ ही इसकी तैयारी में जुट गए. रोजाना 10 घण्टे पढाई करने के साथ पिता के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी लेते थे. माता-पिता के सहयोग की बदौलत उन्होंने दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक करने में सफलता हासिल हुई है. वह बताते है कि पहली बार की असफलता के बाद मिली सफलता के मायने अलग होते है.
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FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 20:12 IST








