
राजाराम मंडल/मधुबनी. पान, माछ और मखाना. वैसे तो यह तीनों देशभर में पाला-उगाया, बेचा और खाया जाता है, लेकिन इन तीनों को मिथिलांचल की शान कहा जाता है. पान खाना इस क्षेत्र के लोगों के लाइफस्टाइल में शुमार है. यही कारण है कि मिथिलांचल के संभ्रांत परिवारों में न सिर्फ पुरुष, बल्कि महिलाएं भी पान खाती हैं. घर में भी पान रखा जाता है. इस दौरान जो लोग घर पर आते हैं, उन्हें पान खाने के लिए आग्रह भी किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैसे पान की बहुत सी वेराइटी होते हैं, वैसे ही पान के पत्ते की भी कई वैरायटी होती हैं.
लोकल में ही बेच लेते हैं पान
किसान रामप्रसाद राउत जिले के अंधराथाढ़ी प्रखंड के रखवारी पंचायत के चतरा टोला रहने वाले हैं. वे पहले से ही पान की खेती करते थे. लेकिन कुछ समय के लिए रामप्रसाद कमाने के लिए दिल्ली चले गए. हालांकि वहां मन नहीं लगा, तो अब वापस गांव में पान की खेती करते हैं. वे कहते हैं कि अब बिहार में पान खाने के शौकीन कम होते जा रहे हैं. इस कारण सेबिहार के किसान पान की खेती कम कर दिए हैं. जबकि देश के कई जगह अभी भी पान उगाया जाता है. ऐसे में उनका पान अब अपने क्षेत्र में ही बिक जाता है.
मौसम और साइज के हिसाब से मिलता है रेट
रामप्रसाद राउत फिलहाल तीन तरह के पान उगाते हैं. इसमें चंदनपूरी, बरगौर और मगही पान है. वे बताते हैं कि पान कच्चा सौदा है. सीजन के हिसाब से इसका रेट मिलता है. वे बताते हैं किठंड के मौसम में पान महंगा बिकता है. एक पान के पत्ता की कीमत 2 से 3 रुपए तक हो जाती है.
हालांकि गर्मी में छोटे और बड़े पान का रेट अलग-अलग रहता है. छोटापान का पत्ता एक रुपए में चार बेचना पड़ता है. जबकि बड़ा पत्ता दो रुपए में एक. साथ ही पुराना पत्ता एक रुपए में दो बिकता है. रामप्रसाद राउत आधे एकड़ में पान का खेती करते है, जिससे उन्हें सालाना एक से डेढ़ लाख तक का मुनाफा हो जाता है.
.
Tags: Agriculture, Bihar News in hindi, Madhubani news
FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 17:39 IST








