Health Matters: 10,000 कदम का लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा, चिंतित ना हों, बस अपने शरीर की सीमाओं को समझिए

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नई दिल्ली: कोरोना के बाद से ही पूरी दुनिया में सेहत को लेकर एक नई तरह की जागरूकता पनपी है. और लोग सेहतमंद खाने के साथ साथ कसरत पर भी संजीदगी के साथ ध्यान देने में लगे हुए हैं. आपको हर दूसरे इंसान के हाथ में डिजिटल घड़ी दिख जाएगी जिसमें वह रोज अपने कदमों का हिसाब रखते हैं. इन कदमों के लिए भी एक जादुई आंकड़ा दुनिया भर में मशहूर है, 10,000 कदम प्रति दिन.
अगर आप भी लगातार कोशिश के बावजूद इस जादुई आंकड़े को नहीं छू पाते हैं और आपको निराशा होती है. तो चलिए इस जादुई आंकड़े के बारे में कुछ बातें जान लेते हैं.

वैसे तो इसमें दो मत नहीं है कि शारीरिक गतिविधियां कई बीमारियों को कम करने में मददगार हैं. जैसे दिल से संबंधी रोग, डिमेंशिया, कैंसर, और असमय मौत, मेटाबोलिज्म, मनोदशा और चिंता जैसी परेशानियों को शारीरिक गतिविधि की मदद से कम किया जा सकता है. इसके लिए 10,000 कदम प्रत्येक दिन के लक्ष्य को सर्वोत्तम माना जा रहा है. जिसको लेकर कई अध्ययन सहमति जताते हैं. लेकिन क्या हमें वाकई में 10,000 कदम रोजाना चलना जरूरी ही है या कुछ कम से भी काम चल सकता है.

10,000 कदम कैसे हो गए इतने अहम
कई जरनल यह दावा करते हैं कि 10,000 कदम प्रति दिन का लक्ष्य कैसे आया इस बात को लेकर कुछ भी साफ नहीं है. वहीं कुछ सिद्धांत इसकी शुरुआत 1965 में बताते हैं. जो शायद जापान की कंपनी यामसा क्लॉक एंड इंस्ट्रुमेंट कंपनी के पेडोमीटर ‘मैनपो-केई ’ से लिया गया है, इस जापानी शब्द का मतलब होता है, ‘10,000 कदमों का मीटर’.

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक चतुर्वेदी इस सिद्धांत के बारे में कहते हैं कि 1964 में टोक्यो ओलंपिक के दौरान 10,000 कदम चलने का विचार मार्केटिंग अभियान (पेडोमीटर के लिए) के तहत शुरू किया गया था.

स्वस्थ व्यक्ति बनाम बीमारियों से ग्रस्त
कई डॉक्टर जो अपने अपने विषय के विशेषज्ञ हैं उनसे बात करके पता चलता है कि कि कदमों को धीरे धीरे बढ़ाना जरूरी है और ज्यादा मेहनत नहीं करनी चाहिए. खासतौर पर अगर आपने नया नया व्यायाम करना शुरू किया है या किसी तरह की कोई स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी है.

अमृता अस्पताल के डॉ. चतुर्वेदी कहते हैं कि, जब स्वास्थ्य की बात आती है तो हर एक कदम मायने रखता है. अगर एक दिन में 4000 कदम भी चलें तो उसका लाभ दिख जाता है, सबसे बड़ा लाभ तो शुरुआती 5000 कदमों में ही नजर आता है, उसके बाद कदमों की संख्या बढ़ने के साथ साथ महत्ता कम होती जाती है. दरअसल तेज चलने से ज्यादा फायदा होता है.

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फोर्टिस सी-डॉक अस्पताल के डायबिटीज एवं एलाइड साइंस के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अनूप मिश्रा का कहना है कि कोई भी व्यक्ति 30 मिनट में 3000 कदमों से शुरुआत कर सकता है. हालांकि अगर वजन घटाना है तो इसे बढ़ाकर 45-60 मिनट तक ले जाना चाहिए. जिसका मतलब हुआ लगभग 6000 कदम.
ऐसे लोग जो डायबिटीज, थायरॉइड या किसी तरह की एंडोक्राइनोलॉजिकल बीमारी से ग्रस्त हैं, मिश्रा उन्हें 50,000 कदम प्रति हफ्ते का लक्ष्य रखने की सलाह देते हैं जिसका मतलब हुआ 7000 कदम प्रति दिन.

वहीं नई दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियेलिटी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग के निदेशक डॉ. बीएस मूर्ति भी हफ्ते के सभी दिन 30 मिनट तक हल्के व्यायाम की सलाह देते हैं. जिसमें चलना, जॉगिंग, या कोई भी ऐसी शारीरिक गतिविधि जिससे आपके दिल की धड़कन बढ़े और पसीना निकले वह शामिल है. आप जब फोन पर बात कर रहें हों तब चल सकते हैं या लिफ्ट की जगह सीढ़ी से जा सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि यहां तक की प्रतिदिन 6000 कदमों का स्वास्थ्य पर लाभ नजर आ जाता है.

एक और विशेषज्ञ डॉ. हेमेंद्र अग्रवाल जो जयपुर में नारायण मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स आर्थ्रोस्कोपी सर्जन हैं, का मानना है कि, कितने कदम चलना चाहिए यह व्यक्ति की उम्र, सेहत का स्तर, और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है. डॉक्टर हेमेंद्र कहते हैं कि, सिर्फ कदमों की संख्या गिनने से बेहतर है कि पूरी शारीरिक गतिविधि पर ध्यान केंद्रित किया जाए, गठिया जैसी बीमारी में चलना, दौड़ने की तुलना में ज्यादा फायदेमंद साबित होता है. और इसमें बगैर शरीर को ज्यादा तनाव दिए फायदा मिलता है.

ज्यादा कदम, कम मृत्यु दर
कई अध्ययनों से सामने आया है कि ज्यादा कदम और कम मृत्यु दर के बीच सीधा नाता है. 2019 में जामा मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में एक साधारण सवाल पूछा गया, क्या बुजुर्ग महिलाओं में कदमों की संख्या बढ़ाने से मृत्यु दर कम होती है? 16,000 महिलाएं जिनकी औसत उम्र 72 थी उन पर 7 दिन तक अध्ययन किया गया. इसके परिणाम बहुत रोचक थे. रोजाना 4400 कदम चलने वाली महिलाओं में कम सक्रिय महिलाओं (2700 कदम प्रतिदिन) की तुलना में 4.3 साल के फॉलोअप के दौरान मृत्युदर कम पाई गई. अध्ययन में पाया गया कि प्रति दिन ज्यादा कदम चलने से (लगभग 7500 कदमों के आने तक) मृत्यु दर कम होती गई.

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इसी तरह 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन, जो रोजाना 10000 कदम चलने वाले 30 लोगों के साथ किया गया था, उसके परिणाम से सामने आया कि ऐसे लोग में चिंता, अवसाद, गुस्सा, थकान, और दूसरी तरह की मनोदशा से जुड़ी तकलीफों का स्कोर काफी कम था. इसी तरह जिन्होंने रोजाना 10,000 कदम चले उनका वजन, कमर की चौड़ाई, बॉडी मास इंडेक्स और रक्त चाप काफी कम था. इसी तरह 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया कि 10000 कदमों वाले 100 दिन का कार्यक्रम करने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार देखने को मिला था.

कुल मिलाकर बात इतनी है
10,000, या 7000 या 5000 जादुई आंकड़ा शायद गणितज्ञों या इंजीनियरों के लिए होता है लेकिन चिकित्सा की दुनिया में यह व्यक्ति दर व्यक्ति अलग हो सकता है. इसलिए कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि अपने शरीर की सीमाओं को समझिए, शरीर को  निष्क्रिय रखना और अत्यधिक सक्रिय रखना दोनों ही एक बराबर नुकसानदायक हो सकते हैं. अगर आप आसान लक्ष्य से शुरुआत करना चाहते हैं तो 5000 से शुरू करें और इसे बढ़ाकर 7000 तक ले जाएं. मूलमंत्र यही है – धीमी शुरुआत, शरीर को सुनना और ऐसी गतिविधि का चुनाव जो मजेदार हो और लंबे समय तक की जा सकती हो.

Tags: Diseases increased, Health News, Mental diseases

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Author: Up Head Line

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