क्या गुल खिलाएगी सीरिया का अरब लीग में वापसी?

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हाइलाइट्स

सीरीया अरब लीग का संस्थापक सदस्य था जब 1945 में उसकी स्थापना हुई थी.
12 साल से सीरिया को अरब लीग से बाहर रखा गया था.
हाल ही में सऊदी अरब के प्रयासों से सीरिया की लीग में वापसी हुई है.

इन दिनों अरब लीग की बैठक हो रही है और इसकी वजह से सुर्खियों में सीरिया के राष्ट्रपति बशर असद हैं क्योंकि उन्हें अरब लीग की 32वी बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब ने अपने शहर जेद्दाह  आमंत्रित किया है और वे बैठक में हिस्सा भी ले रहे हैं.  उनका इस बैठक में भाग लेना ऐसे समय पर है जब इसी महीने सीरिया की अरब लीग में वापसी हुई है. वैसे तो यह बहुत अच्छा कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका मध्य पूर्व और दुनिया पर क्या असर होगा और क्या वास्तव में पश्चिम एशिया में इससे संघर्ष की स्थिति कम करने में मदद मिलेगी यह देखने वाली बात है.

सऊदी के बेहतर संबंध बनाने के प्रयास
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब सीरिया में संघर्ष की स्थिति खत्म नहीं हुई है और इजराइल का मध्य पूर्व में संघर्ष और ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है. वहीं  सऊदी अरब अपने पड़ोसियों से बेहतर संबंध बनाने का प्रयास कर रहा है. इतना ही नहीं सऊदी अरब ने हाल ही में ईरान से बेहतर संबंध बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए दोनों देशों में दूतावास खोलने पर सहमति जताई है.

लीग में सीरिया का औपचारिक स्वागत
बुधवार को लीग में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान अल सऊद ने औपचारिक तौर पर सीरिया का अरब लीग में स्वागत किया. सऊदी अरब ने ही लीग में सीरिया की वपास के लिए अहम भूमिका निभाई है. सऊदी अरब सीरिया के साथ कूटनीतिक संबंध के साथ दोनों देशों के बीच हवाई उड़ानें फिर से शुरू करना चाह रहा है. सऊदी अरब ने असद सरकार से 2012 में संबंध तोड़े थे, लेकिन वह पहला देश नहीं है जिसने सीरिया से संबंध बहाल किए हों. मिस्र, यूएई और बहरीन पहले ही सीरिया से संबंध सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं.

दूरगामी होंगे नतीजे
सऊदी अरब के बिना बाकी देशों का सीरिया के साथ संबंध बहाली का ज्यादा मतलब नहीं था. कई विशषज्ञों का कहना है कि सीरिया की अरब लीग इससे मध्य पूर्व में एक बड़ा बदलाव आ सकता है और इसके नतीजे बहुत दूरगामी हो सकते हैं.  जिस तरह से सीरिया अभी तुर्की और इजराइल के खिलाफ आक्रामकता झेल रहा है. अरब लीग में वापसी सीरिया को एक ताकत देने का काम कर सकती है और वहां के हालात में बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

अरब लीग और सीरिया
अरब का गठन 1945 में छह देशों के बीच एक संगठन के तौर पर हुआ था जिसमें आज उत्तरी,पूर्वी अफ्रीका और मध्यपूर्व के कुल 22 देश हो गए हैं. शुरू में मिर्स, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, यमन और सीरिया ही इस संगठन के सदस्य थे. लेकिन नवंबर 2011 में अरब देशों ने सीरिया क लीग से बाहर कर दिया था जिसकी अब वापसी हुई है.

अरब लीग से क्यों बाहर हुआ सीरिया
सीरिया के अरब लीग से बाहर होने की वजह वहां के घरेलू हालात थे. 2011 में असद सरकार ने सीरिया में विरोध प्रदर्शन को कुचलने की पूरी कोशिश की और इसकी वजह से गृहयुद्ध की स्थिति आ गई थी. तब दुनिया भर में उसका विरोध हो रहा था. तब से अब त इस युद्ध में अब तक पांच लाख लोगों की जान जा चुकी है और लाखों अन्य को विस्थापित होना पड़ा है.

किस को ज्यादा फायदा
सीरिया की अरब लीग में वापसी से सबसे बड़ा फायदा उसे ही होगा और उसके बुनियादी ढ़ांचे को सुधारने की कोशिशों को मदद मिलेगी. लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि सऊदी अरब पिछले कुछ समय से अपने पड़ोसियों से संबंध सुधारने और मध्य पूर्व  के आर्थिक विकास पर जोर देने का काम कर रहा है. वह अपने देश को एक व्यसायिक और पर्यटन हब में तब्दील करना चाह रहा है.

Tags: Research, Russia, Russia ukraine war, Saudi arabia, Syria, World

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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