MBA पुष्पेंद्र का देसी अंदाज; कोल्हू से तैयार कर रहे तेल, विदेशों तक कर रहे सप्लाई

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हिमांशु नारंग/करनाल: जिले के गांव खानपुर में देसी कोल्हू से पुष्पेंद्र कुमार दिन रात कड़ी मेहनत कर तेल तैयार करते हैं. इनके पास हीरा और बादल दो बैल हैं. खास बात यह है कि बैल चलाने वाले पुष्पेंद्र MBA डिग्री धारक हैं.  इस काम को शुरू करने से पहले उनके दोस्तों ने बोला था कि यह नहीं चलेगा, लेकिन प्राचीन संस्कृति को जीवित रखने के लक्ष्य को लेकर प्रकृति का दोहन छोड़कर, प्रकृति की और चलने का निर्णय पुष्पेंद्र ने लिया.

खानपुर के पुष्पेंद्र ने कुछ अलग ही कर कर दिखाया है. उन्होंने करीब 2 साल पहले पुस्तैनी गांव खानपुर में अपनी जीमन पर देसी कोल्हू से तेल बनाने का कार्य शुरू किया, ताकि लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद की जा सके. इसके लिए उन्होंने किसी आधुनिक मशीन का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि एक देसी कोल्हू लगाया. इस कार्य में उनकी मदद दो बैल हीरा और बादल करते हैं, जो दिन रात कड़ी मेहनत कर सरसों, नारियल, मूंगफली, तिलहन व अलसी से तेल निकालते हैं.

बड़ी बात यह है कि जिस काम को आधुनिक मशीन कुछ घंटों में ही पूरा कर देती है, वहीं इस पद्धति में एक क्विंटल अनाज से तेल निकालने के लिए 25 घंटे तक मंथन किया जाता है. पुष्पेंद्र ने बताया कि 2 साल में ही वह अमेरिका समेत कई देशों और राज्यों में कई लोगों को इन तेलों की डिलीवरी दे चुके हैं.

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लाखों खर्च कर लो पर असली सुख प्रकृति के करीब
पुष्पेंद्र के साथ इस काम में उनका छोटा भाई मनीष भी हाथ बटाता है. उनका कहना है कि हम आज प्रकृति से दूर होकर जो खानपान अपना रहे हैं, उससे आए दिन नई-नई बीमारियां फैल रही हैं. लोगों के पास पैसा है, डाइटिशियन की सलाह से खाना, हेल्थ के लिए बंद कमरे में एक्सरसाइज करना आदि विकल्प है. बावजूद इसके फिर भी उन लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो जाती है. इसका कारण है हमारा प्रकृति से दूर होना. अपनी प्राचीन संस्कृति को संजोए रखने के लिए ही हमने इस कार्य की पहल की है, ताकि अन्य युवा भी हमारी संस्कृति को बचाने के लिए कदम उठा सकें. पुष्पेंद्र का परिवार काफी समय से इंद्री में रह रहा है.

मशीनों से निकला तेल होता है गर्म
पुष्पेंद्र ने बताया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए अपने दोस्तों से बात की तो सभी ने कहा कि यह काम नहीं चलेगा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत, लगन और जुनून के साथ अपना प्रोजेक्ट तैयार किया. बताया कि एक कोल्हू लगाने पर 60 से 90 हजार रुपये के बीच खर्च आता है. बताया कि आधुनिक मशीन से बनने वाला तेल, जहां गर्म होता है. वहीं कोल्हू में तैयार तेल पूरी तरह से ठंडा होता है, जहां आधुनिक मशीन से हम एक क्विंटल अनाज से 40 प्रतिशत तेल प्राप्त करते हैं, वहीं कोल्हू से हमें यह केवल 20 प्रतिशत ही प्राप्त होता है.

डॉक्टरों ने भी सराहा
कई डॉक्टरों ने भी इस तेल को काफी सराहा है. बताया कि यह तेल 100 प्रतिशत हेल्दी है. देसी पद्धति से तैयार यह तेल हमारी संस्कृति को भी दर्शाता है. आगे बताया कि इस तेल के अनगिनत फायदे हैं. यह कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से बचाने में भी सहायक है, क्योंकि इस तेल में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

इन अनाजों का तैयार करते हैं तेल
पुष्पेंद्र अपने दो कोल्हू में सरसों, नारियल, मूंगफली, तिलहन और अलसी का तेल तैयार करते हैं. बताया कि बैल संचालित वह दो कोल्हू तैयार कर चुके हैं, अब तीसरा लगाने की तैयारी है. कोल्हू में काम कर रहे देसी बैलों की भी बेहतर परवरिश हो रही है. यहीं नहीं वह अपने बैलों को नाम से पुकारते हैं.

Tags: Haryana news, Karnal news, Start Up, Success Story

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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