Rs 2000 Notes : 2000 के नोट को जमा करने पर याद आएंगे नोटबंदी के दिन, क्या है हरिद्वार की जनता की राय?

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ओम प्रयास/हरिद्वार. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार 30 सितंबर 2023 के बाद 2000 रुपये का नोट प्रचलन के बाहर हो जाएगा. यानी लोगों को एक बार फिर से नोटबंदी के दिन याद आने वाले हैं. जैसे साल 2016 में नोटबंदी के दौरान बैंकों में 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने के लिए लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी थी, वैसे ही अब दोबारा 2000 रुपये के नोट को बदलने या जमा कराने के लिए बैंकों में एक बार फिर से लोगों की लाइनें देखने को मिलेंगी.

जानें क्या है लोगों की राय
2000 रुपये का नोट बंद होने से हरिद्वार के निवासियों पर किस चीज पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा या फिर 2000 रुपये का नोट बंद होने का मुख्य उद्देश्य क्या है, इसकी जानकारी के लिए हमने कुछ हरिद्वार वासियों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि 2000 का नोट 30 सितंबर के बाद मान्य नहीं होगा. सत्तारूढ़ दल द्वारा लोगों को ठगने का काम और लोकसभा चुनाव के लिए यह ₹2000 के नोट इकट्ठे किए जा रहे हैं. आज तक कोई यह बात नहीं समझ पाया कि आखिर ₹2000 का नोट क्यों चलाया गया था और अब नोट बंद क्यों किया जा रहा है.

लोग बोले- काले धन पर लगेगी रोक
वहीं कुछ लोगों ने कहा कि 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं और चुनाव में ब्लैक मनी यानी काला धन सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. यानी 2000 का नोट बंद करने से जहां महंगाई पर लगाम लगेगी. वहीं चुनाव में राजनीतिक दल काला धन इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. हरिद्वार वासियों द्वारा यह भी कहा गया कि बड़ी करेंसी बंद होनी चाहिए.

2000 रुपये के नोट को लेकर हमने हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार रत्नमणि डोभाल से बातचीत की. रत्नमणि डोभाल बताते हैं कि लोगों को आज तक यह बात भी समझ नहीं आई की 2000 का नोट आया क्यों था और अब इस नोट को क्यों बंद किया जा रहा है. साल 2020 से उन्होंने 2000 रुपये का नोट नहीं देखा है. उनका कहना है कि भारत सरकार अब तक यह बात भी स्पष्ट नहीं कर पाई है कि आखिर नोटबंदी के दौरान कितने नोट वापस आए और कितने नोट नए छापे गए थे. नोटबंदी के बाद ₹2000 का नोट काफी प्रचलन में था लेकिन कुछ समय बाद मार्केट से ₹2000 का नोट एकदम से गायब हो गया.

इक्का-दुक्का किसी किसी लोग के पास ₹2000 का नोट देखा जाता था उनका कहना है कि इसका असर छोटे उद्योग करने वाले लोगों पर ज्यादा पड़ेगा. छोटे उद्योग लोगों को ज्यादा रोजगार देते हैं लेकिन इस समय उनकी हालत बेहद ही खराब है. डोभाल बताते हैं कि मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए 2000 का नोट बंद किया जा रहा है, ताकि लोग इसमें ही उलझ कर रह जाएं. यह पूरा खेल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी का है.

लोग फैसले की कर रहे सराहना
हरिद्वार के निवासी दिनेश चंद्र जोशी ने कहा कि 2000 का नोट बंद होना काफी अच्छा है. जिस देश में बड़ी करेंसी होती है, वहां उसकी चलन की क्षमता काफी कम होती है. उनका कहना है कि जब 2000 रुपये का नोट था तो महंगाई थी, महंगाई कम हो गई है इसीलिए 2000 का नोट बंद हो रहा है. दिनेश चंद्र जोशी ने आगे कहा कि आने वाले समय में लोकसभा के चुनाव होने हैं, हम सभी जानते हैं कि चुनाव के दौरान काला धन सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

2000 का नोट बंद होने से राजनीतिक पार्टियां पैसों के बल पर मतदाताओं को प्रभावित न कर पाएं, इसलिए भी 2000 रुपये का बंद होना बहुत फायदेमंद है, जिन राजनैतिक दलों के पास करोड़ों अरबों रुपये काला धन होगा, वह बैंक से उन पैसों को बदल नहीं पाएंगे. वहीं उनका कहना है कि 2000 का नोट बदलने के लिए 4 महीने का समय दिया गया है, जिसका फायदा आम आदमी को होगा. आम आदमी के पास 2, 4, 8, 10, 15, 20 के लगभग 2000 रुपये के नोट होंगे, जिसे वह इन 4 महीनों के समय में आसानी से बैंक जाकर बदल सकता है या फिर अपने खाते में जमा करा सकता है.

हरिद्वार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश बडोनी ने कहा कि नोटबंदी होने के बाद जब नया ₹2000 का नोट मार्केट में आया, तो काला धन रखने वाले लोगों ने उसे मार्केट से बिल्कुल गायब कर दिया और अपने काले धन को ₹2000 के नोट को बदलकर रख लिया. नोटबंदी को 6 महीने भी नहीं हुए कि मार्केट से 2000 रुपये का नोट एकदम से गायब हो गया. नोटबंदी होने के बाद काफी मात्रा में संख्या में 2000 का नोट छपा होगा लेकिन 6 महीने बाद ही ₹2000 रुपये का नोट मार्केट से गायब होने के बाद भी नहीं दिखा. अब सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है, जो काफी अच्छा है.

‘काले धन पर फिर एक बार चोट’
सरकार के इस फैसले से काला धन रखने वाले लोगों को खामियाजा उठाना पड़ेगा. भारत देश में 2000 का नोट पूरे देश से गायब है, इसलिए सरकार द्वारा नोट 2000 रुपये के नोट को बाहर निकालने के लिए 4 महीने का समय रखा गया है. इसलिए 30 सितंबर तक बैंकों के माध्यम से 2000 के नोट बदले जा सकते हैं या फिर जिन लोगों के बैंकों में खाते हैं, वह अपने खातों में उन्हें जमा करा सकते हैं. नोट बंदी एकदम से हुई थी जिस कारण सरकार पर कई सवाल किए गए थे, उसमें लोगों को ज्यादा समय नहीं दिया था. इसलिए सरकार ने इस बार 2000 का नोट बंद करने के लिए 4 महीने का समय रखा है.

जयप्रकाश बडोनी बताते हैं कि वास्तविक रूप से बड़ी करेंसी देश में बंद होनी चाहिए थी. 2000 का नोट आते ही विलुप्त हो गया था. यह सरकार के लिए एक चिंता का विषय था. वर्तमान समय में यह निर्णय लिया जाना काफी अच्छा है. यदि सरकार दोबारा 2000 रुपये का नोट जारी नहीं करती है, तो अच्छा कदम है और यदि अब 2000 के नोट को बैन करके सरकार 5000 रुपये का नोट जारी करती है, तो वह खुद सवालों के घेरे में आ जाएगी, जैसा 2016 में हुआ था.

Tags: Haridwar news, Uttarakhand news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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