सिकुड़ चुकी हैं दुनिया की आधे से ज्यादा झीलें, बाकी भी तेजी से सूख रहीं

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इस समय दुनिया के उत्तरी गोलार्द्ध में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. इससे दुनिया के कई इलाकों में अब तक के सबसे भीषण सूखे के दौर देखने को मिलने लगे हैं. एक नए अध्ययन ने बताया है कि इसका असर नदियों पर ही नहीं बल्कि झीलों पर भी पड़ रहा है और दुनिया की आधी से ज्यादा विशाल झीलें और जलाशय 1990 के आकार की तुलना में बहुत ही चिंताजनक स्तर तक सिकुड़ गए हैं. इससे कृषि, जलशक्ति, मानव आपूर्ति संबंधी आवश्यकताओं के लिए चुनौती होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि झीलों में जमा पानी की मात्रा अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों ही तरहके जलवायु उतार चढ़ाव को प्रतिबिम्बित करता है. लेकिन झीलों में जमा पानी की मात्रा में बदलाव का जलवायु से संबंध बहुत ही जटिल होगा. शोधकर्ताओं ने पाया है कि तीन दशकों से साफ के स्रोत के रूप में यूरोप का कैस्पियन सागर से लेकर एशिया में और दक्षिण अमेरिका की टिटिकाका झील में भी कुल 22 गीगाटन प्रति वर्ष के पानी का नुकसान हो रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) शोधपत्र में बताया गया है कि झीलें विविध प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र को सहेजती हैं और साथ ही कृषि जलशक्ति, और अन्य मानव उपयोगों के लिए पानी का भंडार करके रखती हैं. इन्हें अक्सर जलवायु परिवर्तन का सेन्टिनल्स कहा जाता है. इनमें वर्षण, वाष्पन उत्सर्जन जैसी कई प्रक्रियाओं की भागीदारी होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) प्राकृतिक झीलों में जलवायु के गर्म होने और मानव उपयोग के कारण करीब 56 फीसद कमी होती देखी गई है. जिसमें ग्लोबल वार्मिंग का अधिक योगदान है. वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट मापन के साथ जलवायु और हाइड्रलॉजिकल प्रतिमानों के जरिए करीब 2 हजार बड़ी झीलें का आंकलन किया है और पाया है कि सूखती झीलों के आसपास रहने वाली करीब 2 अरब लोग हाल के सालों में सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons) असंधारणीय मानव उपयोग , बारिश और उसके बहते पानी की मात्रा में बदलाव, अवसादीकरण और बढ़ते तापमानों ने झीलों के स्तरों को वैश्विक तौर कम किया है. इसमें 1992 से लेकर 2020 तक 53 झीलों में जलस्तर कम होते दिखे हैं. अध्ययन में पाया गया है कि इंसानों के अंसाधारणीय उपयोग ने झीलों को सुखा दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons) देखा गया है कि मध्य एशिया का अराल सागर, मध्य पूर्व का मृत सागर, इंसानों की लापरवाही से सूख रही हैं तो वहीं अफगानिस्तान, मिस्र, मंगोलिया की झीलों पर बढ़ता तापमान कहर ढा रहा है. इससे वायुमंडल में पानी की हानि हो रही है. टीम का कहना हैकि जलवायु परिवर्तन के अलावा सीधी मानव गतिविधियां जैसे की भंडारण प्रबंधन, भूमि उपयोग बदलाव भी झीलों के भंडारण को प्रभावित करते है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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Author: Up Head Line

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