हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता पर पीएम मोदी सख्त, सुरक्षा हितों पर चेताया

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हाइलाइट्स

पीएम मोदी ने कहा, गांधीवादी आदर्श विश्व में लाखों लोगों को ताकत देते हैं
परमाणु हथियारों के बिना दुनिया की दिशा में सभी देशों के साथ काम करने को तैयार
रूस से तेल आयात पर मोदी ने कहा, भारत लोगों की भलाई को महत्व देता है

नई दिल्ली. जापान के हीरोशिमा में आयोजित G-7 बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के प्रमुख से वार्ता कर रहे हैं. जापान के एक अखबार को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन के सैन्य विस्तार को लेकर कहा कि भारत समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हुए अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन के सैन्य विस्तार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. हम अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. जापान के एक अखबार योमिउरी शिंबुन को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी से पूछा गया था कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और ताइवान में बढ़ते तनाव से कैसे निपटेगा? इस पर पीएम मोदी ने जवाब दिया, “भारत संप्रभुता का सम्मान करने, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतर्राष्ट्रीय कानून के पालन के लिए खड़ा है.

गांधीवादी आदर्श विश्व में लाखों लोगों को ताकत देते हैं
पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए शुक्रवार को जापान पहुंचे थे. जापान के हिरोशिमा शहर में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए मोदी ने कहा कि सामूहिक विनाश के हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है. गांधी की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति और सद्भाव के गांधीवादी आदर्श विश्व स्तर पर गूंजते हैं और लाखों लोगों को ताकत देते हैं.

परमाणु हथियारों का उपयोग स्वीकार नहीं
जापानी दैनिक के साथ एक साक्षात्कार में, पीएम मोदी ने यह स्पष्ट किया कि वह परमाणु हथियारों के उपयोग को स्वीकार नहीं करेंगे, यह कहते हुए, “सामूहिक विनाश के हथियारों का उपयोग बिल्कुल अस्वीकार्य है. उन्होंने संकेत दिया कि वह प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा द्वारा प्रस्तावित ‘परमाणु हथियारों के बिना दुनिया’ की दिशा में सभी देशों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं.

रूस से तेल आयात के सवाल पर क्या बोले मोदी?
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर मतदान से दूर रहने और रूस से तेल आयात बढ़ने के संबंध में नकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत विवादों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति की वकालत करता है. आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत से प्रभावित लोगों की भलाई को प्राथमिकता देता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रसतावों से रहा दूर
उन्होंने कहा, ‘भारत ने हमले की निंदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों से अनुपस्थित रहा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. भारत यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है और संयुक्त राष्ट्र के भीतर और उससे परे रचनात्मक योगदान देने के लिए तैयार है.

Tags: G-7 Summit, India china dispute, Pm narendra modi, World news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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