
हाइलाइट्स
विश्लेषण से पता चलता कि BJP के वोट शेयर में भी भारी गिरावट आई है
जीतने वाली सीटों के वोट शेयर में भी 20 फीसद से 40 फीसद तक गिरावट
दशकों से RSS-भाजपा के गढ़ दक्षिण कन्नड़ में भी वोट शेयर गिरा
मधुपर्णा दास
बेंगलुरु. कर्नाटक चुनाव (Karnataka Assembly Elections) के नतीजे आए एक हफ्ता गुजर चुका है. अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अलग-अलग नजरिये से मंथन करने में जुट गए हैं. जहां कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को मुख्यमंत्री बनाए जाने के राजनीतिक असर का आकलन कर रहे हैं. वहीं संघ और भाजपा (RSS-BJP) के वरिष्ठ इस बात का विश्लेषण करने में व्यस्त हैं कि तटीय कर्नाटक क्षेत्र (coastal Karnataka region) में हिंदुत्व का पासा क्यों नहीं चला.
भाजपा महासचिव बीएल संतोष और संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के बीच एक सहज समीकरण होने के बावजूद भगवा पार्टी का तटीय कर्नाटक में कुल वोट शेयर कई सीटों पर घटकर आधा रह गया है. यही नहीं सीटों की संख्या में भी गिरावट आई, जहां 2018 के चुनाव में भाजपा ने 17 सीट हासिल की थीं. वह इस बार के चुनाव में सिमट कर 13 रह गईं.
कर्नाटक के तटीय क्षेत्र (Coastal Karnataka Region) में तीन जिले शामिल हैं और इस क्षेत्र में कुल 19 विधानसभा सीट आती हैं. इन 19 विधानसभा सीटों में दक्षिण कन्नड़, उडुपि और उत्तर कन्नड़ जिले आते हैं. जिनमें से भाजपा उत्तर कन्नड़ (Uttara Kannada) में दो सीट और दक्षिण कन्नड़ में एक सीट पर हारी. न्यूज 18 के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा के वोट शेयर में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. यहां तक की जिन सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की है वहां भी वोट शेयर 20 फीसद से 40 फीसद तक गिरा है.
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इस बार वोट शेयर में भी आई भारी गिरावट
दक्षिण कन्नड़ वह क्षेत्र है जो दशकों से संघ-भाजपा (RSS-BJP) का गढ़ रहा है, यहां भी वोट शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई. यहां तक की जिन सीटों पर पार्टी जीती वहां भी यही हाल रहा. जैसे दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) की बेल्थंगडी सीट (Belthangady). भले ही यह सीट भाजपा (BJP) ने जीती हो. लेकिन यहां भाजपा का वोट शेयर 2018 में 82 फीसद था. 2023 में यह गिरकर 53 फीसद रह गया.
इसी तरह मूदाबिद्री (Moodabidri) जहां संघ-भाजपा की अच्छी पकड़ मानी जाती है, यहां भी भगवा पार्टी के वोट शेयर 2018 में मिले 76.19 फीसद से गिरकर 56 फीसद पर आ गए. ऐसे ही सुल्लीला (Sullia) में भाजपा के वोट शेयर में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 2018 के 89 फीसद के मुकाबले 57 फीसद ही रहा. यह वह सीट हैं जहां भाजपा पिछले तीन विधानसभा चुनावों (Assembly elections) से बड़े अंतर से जीत दर्ज करती रही है.
जिले की पुत्तूर (Puttur) सीट पर भाजपा को कांग्रेस (Congress) से हार का सामना करना पड़ा, जबकि यहां हिंदु मतदाताओं का प्रतिशत 72 है जबकि कुल मुस्लिम मतदाता 23 फीसद ही हैं. 2018 में भाजपा को यहां रिकॉर्ड 82.47 फीसद वोट हासिल हुए थे, जो इस बार घटकर 23 फीसद ही रह गए है. इस परिणाम से संघ को बहुत निराशा हुई है क्योंकि संगठन तटीय कर्नाटक में जमीनी स्तर पर सबसे ज्यादा सक्रिय है. उन्हें इन इलाकों में अपने कई कार्यकर्ताओं को भी खोना पड़ा क्योंकि उनकी हत्या कर दी गई थी.
कर्नाटक चुनाव के परिणामों के बाद उत्तर कन्नड़ (Uttara Kannada) की बात की जाए तो यहां की 6 सीटों में से 2 पर भाजपा को जीत हासिल हुई- येल्लापुर और कुम्टा. बाकी 4 सीटें सिरसी, करावर, हलियाल और भटकल कांग्रेस के कब्जे में आई हैं. दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) में भाजपा को 6 सीटों पर जीत मिली जिनमें मूदबिद्री, बंटवल, सुल्लीला, मंगलुरु शहर दक्षिण, मंगुलुरु शहर उत्तर और बाल्थंगडी. कांग्रेस को पुत्तूर और मंगलुरु में जीत मिली.
हलाल-हिजाब की बात नहीं… लेकिन असुरक्षा
एक वरिष्ठ संघ कार्यकर्ता ने न्यूज 18 को बताया कि चुनाव हिजाब-हलाल (Hijab or Halal) मुद्दे की वजह से नहीं हारे जबकि इसे ही हार का अहम कारण बताया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘हिजाब-हलाल मुद्दे असामान्य नहीं थे. इन मुद्दों पर यहां सवाल उठाए जाते रहे हैं. यह दुर्भाग्य की बात है कि हमारी सरकार जो हमारी अपनी है, वह अपने स्वंयसेवकों, हमारे सदस्यों के साथ खड़ी नहीं हुई, उन्होंनें पीएफआई के कट्टरपंथियों और उग्रवादियों के खिलाफ अकेले लड़ाई लड़ी है.’
उल्लेखनीय है कि संघ सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेत्तरू की हत्या संघ के लिए एक निर्णायक मोड़ था. इसकी वजह से सरकार के खिलाफ संघ और स्थानीय नेताओं में नाराजगी बढ़ गई थी.
संघ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘हमारे दर्जनों युवा स्वंयसेवकों को मार दिया गया, हमारी धार्मिक मूल्यों की रक्षा करते हुए ना जाने कितने बुरी तरह घायल हुए. लेकिन उनकी और उनके परिवार की सरकार ने सुध तक नहीं ली. हम संघ के लोगों और कुछ स्थानीय लोगों ने मिलकर किसी तरह परिवार चलाए, जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके. कुछ हत्या के मामले तो दशकों से अटके पड़े हैं, गवाह भी मुकर गए हैं. सरकार ने कुछ भी नहीं किया इस वजह से हमारे युवा असुरक्षित महसूस कर रहे थे.’
कर्नाटक में तटीय क्षेत्र से बाहर के एक वरिष्ठ संघ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘ऐसी कई सीटें जहां हिंदु बहुमत में थे, भाजपा के वोट शेयर में 30 से 40 फीसद की गिरावट आई है. कुछ में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों के लिए यह कुछ अजीब और असामान्य बात नहीं है? कोई भी जो इस क्षेत्र को समझता है, वह इसे गंभीर चिंता के साथ देखेगा. हमारे कार्यकर्ता बाहर नहीं जा पाए, उन्होंने अपना आत्मविश्वास ही खो दिया है.’
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Tags: BJP Vote Share, Karnataka Assembly Election 2023, Karnataka Assembly Elections, Karnataka Election Result, RSS
FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 16:53 IST








