
रिपोर्ट- सोनिया मिश्रा
चमोली. उत्तराखंड के चमोली जिले में आदिबद्री मंदिर स्थित है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है. चमोली जिले में पंच बद्री स्थित है जिनमें से एक बद्री आदिबद्री भी है जो बद्रीनाथ धाम से पहले पूजनीय माना जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने तीन युगों तक इसी धाम में निवास किया था. और प्रतिवर्ष मंदिर में नौठा उत्सव का आयोजन किया जाता है. यह मंदिर रानीखेत मार्ग पर कर्णप्रयाग से करीब 17 किलोमीटर दूर है. माना जाता है कि बद्रीनाथ से पहले यहीं पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती थी. भगवान विष्णु प्रथम तीन युगों सतयुग, द्वापर युग और त्रेतायुग तक आदिबद्री मंदिर में ही रहे और कलयुग में वह बद्रीनाथ मंदिर चले गए.
वर्तमान में यहां भगवान विष्णु के मुख्य मंदिर के अलावा 13 और मंदिर हैं. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार, यहां पहले कुल 16 मंदिर हुआ करते थे लेकिन दो मंदिर नष्ट हो गए. माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण स्वर्ग जाते समय पांडवों ने किया था. कुछ मान्यताओं के अनुसार, आदि गुरू शंकराचार्य ने इन मंदिरों का निर्माण 8वीं सदी में किया था, जबकि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग का मानना है कि आदिबद्री मंदिर समूह का निर्माण 8वीं से 11वीं सदी के बीच कत्यूरी वंश के राजाओं ने करवाया था.
कब से कब तक खुलते हैं मंदिर के कपाट
मंदिर के कपाट दिसंबर के बीच से और 14 जनवरी तक बंद कर दिए जाते हैं और मकर सक्रांति में पुनः कपाट खोल दिए जाते हैं.आदि बद्री मंदिर में भी पूजा का विधि विधान बद्रीनाथ मंदिर के समान ही है. यहां प्रातः भगवान विष्णु को स्नान कराने और साज-सज्जा के बाद कपाट खोले जाते हैं और आरती की जाती है. वहीं संध्या में भी भगवान की आरती के बाद मंदिर के द्वार बंद कर लिए जाते हैं. भगवान बद्रीनाथ के मंदिर दर्शन से पहले आदि बद्री मंदिर के दर्शन की मान्यता है.
मान्यता है कि जो आदि बद्री मंदिर के दर्शन के बाद तुलसी से बना चरणामृत ग्रहण करता है, भगवान विष्णु की सदैव उस पर कृपा दृष्टि बनी रहती है. मंदिर के पुजारी तरुण थपलियाल ने बताया कि तीन युगों (सतयुग,त्रेता द्वापर) में भगवान नारायण यहीं आदिबद्री धाम में विराजित थे.और इसीलिए इसे प्राचीन बद्री भी कहते हैं जब मंदिर का निर्माण हुआ था तो उस समय मंदिर प्रांगण में 16 मंदिरों का समूह था जिसमें से कुछ मंदिर अब खंडित हो गए हैं जिस कारण यहां अब संख्या 14 ही बची है.
वेदव्यास द्वारा लिखा गई थी गीता
साथ ही वह बताते हैं कि मंदिर में भगवान विष्णु, गरुण, सत्यनारायण, लक्ष्मीनारायण, कुबेर, क्षेत्रपाल देवता समेत कई देवता मंदिर में मौजूद हैं. और इसी स्थान पर भगवान वेदव्यास द्वारा गीता लिखी गई थी. और जो श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम जाने में असमर्थ है या नहीं जा सकते हैं तो यदि वह आदिबद्री में भगवान के दर्शन करता है तो उसे बद्रीनाथ धाम के समान ही पुण्य प्राप्त होता है.
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FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 14:52 IST








