Exercise what is the right time to do it Morning afternoon or evening

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फिट रहने के लिए कसरत और शारीरिक सक्रियता जरूरी है. इसे रोजमर्रा और साप्ताहिक रूटीन का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन व्यायाम के लिए सही समय क्या होना चाहिए, यह सवाल हम सभी के मन में आता है. सेहत पर हुए अनोखे अध्ययन में कुछ चौंका देने वाले तथ्य सामने आए हैं.

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अध्ययन में मध्य दोपहर का समय दिन में 11 बजे से 5 बजे तक के समय को, शाम का समय 5 बजे से मध्यरात्रि को और सुबह का समय 5 बजे से दिन के 11 बजे को माना गया है. इसके साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि दिन किसी भी समय मध्यम से तीव्र सक्रिय गतिविधि कुछ ना करने से तो बेहतर ही है. इस अध्ययन में यूके के 92 हजारों लोगों को शामिल किया गया जिनके आकड़ों का आंकलन एक बायोमेडिकल डेटाबेस के आधार पर किया गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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प्रतिभागियों को एक्सीलिरोमीटर दिए गए थे जिससे मापा जाता है कि सात दिन के समय में वे कब और कितना तेज वर्कआउट करते हैं. उसके बाद शोधकर्ताओं ने कई सालों बाद मृत्यु दर के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि करीब तीन फीसद प्रतिभागी अब इस दुनिया में नहीं हैं. जिन प्रतिभागियों की मृत्यु हुई, उसमें एक हजार दिल की बीमारी से और करीब 1800 कैंसर से पीड़ित थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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अध्ययन में पाया गया कि सुबह और शाम की तुलना में दिन के बीच में शारीरिक मेहनत कनरे वालों में मौत का जोखिम कम रहा. ऐसा ही कुछ उन लोगों के साथ भी सही था जिनका मिश्रित कसरत का समय था या जिन्होंने नियमित तौर पर अपने वर्कआउट समय सारणी में बदलाव किए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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पाश्चात्य देश के इस अध्ययन भारत के माहौल मुताबिक कितना मुफीद है इस पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सर एचएन रिलायंस फॉउंडेशन हॉस्पिटल में रीहैब्लिटेशन एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ आशीष कॉन्ट्रैक्टर कहते हैं कि यह रोचक अध्ययन एक बार फिर मध्यम से तीव्र शारीरिक सक्रियता के महत्व को रेखांकित करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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इस अध्ययन के बारे में डॉ कान्ट्रैक्टर का कहना है कि मध्यम से तीव्र स्तर की शरीरिक कसरत सभा कारणों से होने वाली मौत को रोक सकती है जिसमें कैंसर और हृदवाहिका रोग भी शामिल हैं. लेकिन उनका मानना है कि वर्कआउट के लिए सर्वश्रेष्ठ समय जैसा का बहुत महत्व नहीं है. बल्कि वर्कआउट का नियमित होना ज्यादा मायने रखता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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अहम बात यह है कि कसरत और शारीरिक गतिविधि को रोजमर्रा और साप्ताहिक रूटीन का हिस्सा बनाना ज्यादा जरूरी है. सबसे अच्छा यही है कि यह अपनी सुविधा के मुताबिक किया जाए जिसे लंबे समय तक कायम रखा जा सके और सबसे ज्यादा मायने भी यही रहता है. साफ है कि अध्ययन के नतीजों से सहमत होना आसान नहीं है जबतक कि उसके नतीजे व्यापक तौर पर हासिल ना किए जा सकें. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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