
सच्चिदानन्द/पटना. बिहार की राजधानी पटना के तरेत पाली में पांच दिन की हनुमंत कथा के बाद बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री विदा हो गए हैं. अंतिम दिन कथा कहने के बाद बाबा तरेत पाली से सीधे पटना एयरपोर्ट पहुंचे और फिर खजुराहो के लिए रवाना हो गए. इस दौरान एयरपोर्ट पर भी बाबा को देखने के लिए भीड़ उमड़ी. भक्तों के आंखों से आंसू छलक रहे थे. इन पांच दिनों में भक्तों का बाबा से ऐसा रिश्ता बन गया कि कोई भी उन्हें जाने नहीं देना चाहता था.
13 मई को तड़के सुबह 8 बजे पंडित धीरेंद्र शास्री पटना एयरपोर्ट पहुंचे थे. इसके बाद वह एयरपोर्ट से पटना के एक निजी होटल पहुंचे. इस दौरान पूरे रास्ते भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. शाम को बाबा होटल से कथा स्थल पहुंचे और फिर कथा कहने के बाद वापस होटल स्थित निवास स्थल पहुंचे. यही सिलसिला चारों दिन रहा, लेकिन अंतिम दिन वे कथा स्थल से सीधे एयरपोर्ट पहुंचे और खजुराहो के लिए रवाना हो गए. इस दौरान पूरे रास्ते बाबा के भक्तों का मेला लगा रहा. होटल से लेकर कथा स्थल तक सड़क पर भी सिर्फ भक्त ही भक्त दिखाई दिए. सभी भक्तों की एक ही इच्छा थी कि एक बार बस बाबा के दर्शन हो जाएं. इस दौरान जिनको बाबा का के दर्शन नहीं हुए वह उनकी गाड़ी को छूकर ही आशीर्वाद लेते दिखे.
कथा में उमड़ी भारी भीड़
बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा सुनने जबरदस्त भीड़ पहुंची. कथा के दूसरे दिन भीषण गर्मी के बीच करीब 7-8 लाख लोगों की एकजुटता एक ही स्थान पर होने की वजह से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत आने लगी. भीड़ बेकाबू हो रही थी और पंडाल में हर जगह धूल ही धूल उड़ रहा था. इसी वजह से कथा को बीच में रोकते हुए बाबा ने लोगों से अपील कर दी कि अगले दिन कोई भी कथा सुनने नहीं आएं. भक्तों ने बाबा की बात मानी और अगले दिन भीड़ में कमी आई, लेकिन फिर दूसरे दिन छोड़कर हर दिन औसतन 5 लाख लोगों की भीड़ रही.








