
जुगल कलाल/ डूंगरपुर. डूंगरपुर में साप निकलने पर हर आदमी के जेहन में ललित श्रीमाली का नाम आ जाता है. सांप पकड़ने के शौकीन ललित के सामने बड़े विषधर सांप भी नत मस्तक हो जाते हैं. वह सांपों को काफी आसानी से पकड़ लेते हैं.
सांप का नाम सुनते ही सभी के मन में दहशत फैल जाती है. लोग किसी भी कीमत पर उसे मारना चाहते हैं. लेकिन, ललित श्रीमाली सांपो के दोस्त हैं. ललित श्रीमाली की 15 साल की ऊर्म में ही सांपों से दोस्ती हो गई थीं. अब ललित 53 साल के हो गए और ललित पिछले 36 सालों में हज़ारों सांपों को रेस्क्यू कर चुके हैं. ललित श्रीमाली अभी तक 424 अजगर, 10 मगरमच्छ और अन गिनत सांप को रेस्क्यू कर चुके हैं. वहीं, ललित जानवरों के पकड़ने के अलावा गोताखोर का भी काम करते हैं. ललित पानी में डूबी हुई 111 लाशों को भी बाहर निकाल चुके हैं.
ललित बताते हैं कि ज्यादातर वो सांप मिलते हैं जो जहरीले नहीं होते. डूंगरपुर में ज़्यादातर ज़हरीले सांपों में कोबरा या कॉमन क्रेट पाया जाता है. कोबरा चूहे खाने के लिए आता हैं और कॉमन क्रेट बारिश के दिनों में बाहर निकलता हैं. कॉमन क्रेट में कोबरा से भी 6 गुना ज़्यादा ज़हर होता हैं. ललित श्रीमाली का कहना है कि सांप बहुत ही फुर्तीला होता है, इसलिए पकड़ने में बहुत ही सावधानी की जरूरत होती है. इसके लिए एक लंबी व पतली वस्तु का इस्तेमाल किया जाता है. यह लोहे या लकड़ी का होता है. इसकी बनावट इस तरह रहती है कि सांप के फन को मोड़कर दबाया जा सके. इसके बाद उसे प्लास्टिक के डिब्बे या किसी बोरे में डाल दिया जाता है. वहीं, कुछ मामलों में वह सिर्फ हाथ का इस्तेमाल करते हैं. वो कहते हैं, ‘मुझे डर नहीं लगता.
ललित श्रीमाली के अनुसार डूंगरपुर में ज्यादातर कोबरा और रेट स्नेक पाया जाता है. रेट स्नेक ज्यादा घातक होता है. रेट स्नेक गंदगी वाली जगह ज्यादा आता है. इसके लिए घर के आस पास साफ़ सफाई रखनी चाहिए. ताकि रेट स्नेक से बचा जा सकें. वहीं, कोबरा सांप चूहे की तलाश में बिल से निकलता है और उसका जहर भी घातक रहता है.
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FIRST PUBLISHED : May 15, 2023, 15:39 IST








