Ferrari से लेना था बेइज्जती का बदला, किसान के बेटे ने बना डाली Lamborghini

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हाइलाइट्स

लेम्बोर्गिनी की स्थापना फारुशियो लेम्बोर्गिनी ने इटली में की थी.
फरारी से अपमान के बाद लिया खुद की कार कंपनी शुरू करने का फैसला.
आज दुनिया भर में लेम्बोर्गिनी की स्पोर्ट्स कारें हैं मशहूर.

History Of Lamborghini: ‘लेम्बोर्गिनी’ इस नाम को सुनते ही आपके दिमाग में एक बेहद स्टाइलिश दिखने वाली स्पोर्ट्स कार की तस्वीर सामने आ जाती है. लेम्बोर्गिनी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध कार कंपनियों में से एक है और दुनिया भर में अपनी तेज तर्रार सुपर कारों के लिए जानी जाती है. हालांकि लेम्बोर्गिनी हमेशा से ही वैसी नहीं थी जिस रूप में आज वह जानी जाती है. इस कंपनी के अस्तित्व में आने की कहानी बड़ी दिलचस्प है और एक इंजीनियर की कारों के प्रति जुनून से भरी हुई है.

एक कार कंपनी के रूप में लेम्बोर्गिनी की स्थापना फारुशियो लेम्बोर्गिनी ने 1963 में इटली के सेंट-अगाता बोलोनीज में की थी. फारुशियो सुपर कारों के शौकीन थे और उस दौर में महंगी लग्जरी गाड़ियों को रखने के लिए इटली में मशहूर थे. लेकिन लेम्बोर्गिनी को एक स्पोर्ट्स कार ब्रांड के रूप में खड़ा करने की कहानी उनके शौक से नहीं, बल्कि एक शख्स द्वारा की गई उनकी बेइज्जती से जुड़ा है.

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कार नहीं… ये बनाती थी कंपनी
जी हां! हम जिस कंपनी को उसके स्पोर्ट्स कारों के लिए जानते हैं वह कार नहीं, बल्कि खेतों में चलने वाला ट्रैक्टर बनाती थी. दरअसल, 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद, इटली में मित्र देशों ने कई सैनिक वाहन और उपकरण पीछे छोड़ दिए थे. वैसे तो फारुशियो लेम्बोर्गिनी एक किसान के बेटे थे, लेकिन उनकी रुची हमेशा से ही मशीनों में थी. युद्ध के दौरान वह इटली की सेना से जुड़े और मैकेनिक बनकर लड़ाकू विमानों और वाहनों को ठीक किया.

कुछ समय बाद फारुशियो ने युद्ध के बाद बेकार पड़े वाहनों से ट्रैक्टर बनाने का कारोबार शुरू किया. धीरे-धीरे उनकी फैक्ट्री में बने दमदार ट्रैक्टर इटली में मशहूर हो गए और उनकी डिमांड इतनी बढ़ गई कि उन्हें एक नया प्लांट खोलना पड़ा और कई नए लोगों की भर्ती करनी पड़ी. कुछ सालों में ही उनका ये काम एक बड़ी कंपनी का रूप के चुका था.

बेइज्जती का बदला ‘कार ब्रांड’
बेइज्जती को अवसर में कैसे बदलना है, फारुशियो लेम्बोर्गिनी से बड़ा उदहारण शायद ही कोई हो सकता है. बताते चलें कि फारुशियो को स्पोर्ट्स कारों का शौक था. उनके पास एक जगुआर, एक मासेराती, एक टॉप-एंड मर्सिडीज और दो फरारी कारें थीं. सभी कारें अच्छी चलती थीं, लेकिन फरारी की कार का खराब क्लच उन्हें बार-बार परेशान कर रहा था, जिस वजह से उन्हें कार को ठीक करवाने के लिए कई बार फरारी की फैक्ट्री जाना पड़ता था.

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जब कार की समस्या ठीक नहीं हुई तो उन्होंने इसकी जांच अपने ट्रैक्टर के मैकेनिकों से करवाई. इसमें पता चला कि फरारी में असल में पुराने ट्रैक्टर के क्लच का इस्तेमाल किया जा रहा है जो कार कार के लिए ठीक नहीं है. फरारी इस क्लच को ठीक करने के लिए 1000 लीयर वसूलती थी, जबकि लेम्बोर्गिनी की फैक्ट्री में इसे केवल 10 लीयर में ही ठीक कर दिया जाता था.

इस बात से नाराज फारुशियो लेम्बोर्गिनी खुद फरारी के मालिक एंजो फरारी से मिलने चले गए और अपनी आपबीती सुनाई. हालांकि, फारुशियो की बात सुनकर एंजो फरारी भड़क उठे और उनपर चिल्लाते हुए कहा कि समस्या कार में नहीं, ड्राइवर में है. उन्होंने लेम्बोर्गिनी से कहा कि वह ट्रैक्टर बनाते हैं इसलिए उन्हें कार की समझ नहीं है.

इस अपमान ने फारुशियो लेम्बोर्गिनी को खुद अपनी स्पोर्ट्स कार बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने एक कारखाना बनाया, फरारी के कुछ इंजीनियरों को काम पर रखा और एक शानदार हाई स्पीड कार तैयार की जो 240 किल घंटा की टॉप स्पीड पर चल सकती थी.

लेम्बोर्गिनी ने अपने कारखाने के निकले पहले मॉडल का नाम Lamborghini 350 GT दिया था. लेम्बोर्गिनी ने अपनी नई कार के लोगो के रूप में अपनी राशि- टारस को चुना जो कि एक बैल था. इसे ‘रेजिंग बुल’ भी कहा जाता है. लेम्बोर्गिनी के शुरू होने के बाद दोनों ब्रांड्स की स्पोर्ट्स कारें दशकों से एक दूसरे को हर मामले में टक्कर देती आ रही हैं.

Tags: Auto News, Cars

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Author: Up Head Line

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