सलाखों के पीछे रहकर 10 सालों से मां कर रही 4 बेटियों की परवरिश, कहानी जान आंखें हो जाएगी नम 

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

अनुज गौतम, सागर. आपको एक ऐसी मां की कहानी बताते हैं, जिसने गुनाह किया तो जेल में सजा काट रही है, लेकिन उसके द्वारा अब जो प्रायश्चित किया जा रहा है वह लोगों के लिए मिसाल बन गया है.उस मां की 4 बेटियां हैं, वह अपने घर पर बिन मां बाप के रहती हैं, लेकिन इनके लालन पालन में कोई परेशानी ना आएं, किसी भी प्रकार की तकलीफ ना हो, इसलिए जेल में कटने वाले समय को इन बच्चियों के लिए समर्पित कर दिया है.

इस मां को हर पल उन बेटियों की चिंता सताती है, कि उनका भविष्य अच्छा बन जाए. महिला के द्वारा जेल में सिर्फ इसलिए काम किया जाता है, ताकि वह अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दिला सके और उनके लिए वे अफसर बन सके, उनका रहन-सहन अच्छे से हो जाए, उन्हें खाने पीने में कोई तकलीफ ना हो. इसके लिए मां 3 महीने तक जेल के अंदर पापड़ बनाने का और गेहूं की चुनाई करने का काम करती है, जितना भी पैसा इन महीनों में एकत्रित हो जाता है. उन्हें लेकर हर 3 महीने में पैरोल पर जाती है और बच्चियों के स्कूल की फीस भर देती है.

सभी बच्चियां प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही है. पैरोल पर बाहर निकली मां ट्यूशन फीस देती है, खाने-पीने की सामग्री सब रख देती है, कपड़े से लेकर हर चीज की व्यवस्था कर देती है. पैरोल के 15 दिनों में वह अपनी बच्चियों के लिए भरपूर प्यार करती है, हालांकि इसमें कुछ मदद उसकी खेती से भी हो जाती है जिसे वह ठेके पर दे देती है. कपड़ों जैसी कुछ व्यवस्था जेल के अधिकारी भी करवा देते है.

यह है एक मजबूर मां की कहानी
कृष्णा तिवारी नाम की महिला सागर के केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में है, वह पिछले 10 सालों से हत्या के एक मामले में सजा काट रही है. कृष्णा तिवारी टीकमगढ़ जिले के खरगापुर तहसील के टीला गांव की रहने वाली है, उसकी 4 बेटियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी बेटी की उम्र 12 साल है वह कक्षा छठवीं में पढ़ती है, दूसरे नंबर की बेटी 8 साल की है जो कक्षा दूसरी में पढ़ती है, तीसरे नंबर की बेटी 7 साल की है जो पहली कक्षा में इस साल एडमिशन करवाया है, वही चौथी बेटी 4 साल की है.

इन बेटियों के पिता शराबी हैं, जो उधम करते है, झगड़े करते रहते हैं जिसकी वजह से पुलिस उसे पकड़ कर जेल में बंद कर देती है, पिछले 2 साल से एक मामले में वह फरार भी चल रहे हैं इसलिए घर नहीं जाते हैं. बेटियां केवल घर पर अकेली रहती हैं.

जेल अधिकारी गीता राठौर ने बताया कि यहां पर महिलाओं के लिए शासन के अनुसार जो नियम है उसके हिसाब से खाना दिया जाता है. रहने के लिए महिला वार्ड है और महिलाओं को काम करने के लिए सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, चुनाई जैसे काम है जिस महिला पर जो काम बनता है वह करती हैं.

Tags: Madhya pradesh news, Sagar news

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें