
अर्पित बड़कुल/दमोह: जिले के कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र आचार्य श्री विधासागर जी महाराज के आर्शीवाद से खोले गए हतकरघा में कपड़े तैयार किए जा रहे हैं, जो दाम में अधिक भले हैं लेकिन 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी देते हैं. ये कपड़े अब दुकानों की शोभा बढ़ा रहे हैं और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं.
हथकरघा क्षेत्र देश की शानदार सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. साथ ही देश में आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. यह क्षेत्र महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 70 प्रतिशत हथकरघा बुनकर और संबद्ध श्रमिक महिलाएं हैं. दमोह के कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है.
आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के सपने को साकार बनाने में हथकरघा उद्योग एक मजबूत कड़ी है. यही वजह है कि इस क्षेत्र को और समृद्ध करने की कोशिशें आज भी जारी हैं. हथकरघा उद्योग भारत में रोजगार का स्वदेशी और प्राचीन जरिया है. कृषि के बाद हथकरघा ही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें मजदूरों की बहुत बड़ी संख्या है. हथकरघा सर्वाधिक रोजगार देने वाला कुटीर उद्योग है.
कपड़ों की है डिमांड
दुकानदार पीयूष रैकवार ने बताया कि उनकी दुकान की शुरुआत 2017 में हुई थी. यहां तैयार हुए कपड़ों में सबसे बड़ी खासियत यह है कि कढ़ाई बुनाई से लेकर सभी कार्य हाथ से होता है. हथकरघा से शुद्ध कॉटन के कपड़े तैयार किए जाते हैं जैसे कि धोती, दुपट्टा, रुमाल, साड़ियां, कुर्ता, लोबर, टीशर्ट और शर्ट ये सभी कपड़े तैयार किए जाते हैं. इनकी डिमांड भी खूब है.
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FIRST PUBLISHED : May 11, 2023, 19:07 IST








