चीन की वार्निंग की अनदेखी कर हुई इमरान खान की गिरफ्तारी? पाकिस्तान को भुगतने होंगे परिणाम! जानें

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Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मंगलवार को एक कोर्ट के बाहर पाक रेंजर्स द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद से पाकिस्तान की राजनीति में एकदम से भूचाल आ गया है. देश के विभिन्न भागों में हिंसा और आगजनी की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. काबू पाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने देश भर में इंटरनेट बैन कर ट्विटर, यूट्यूब, फेसबुक जैसे सभी सोशल मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. इमरान खान की गिरफ्तारी हाल के चीनी विदेश मंत्री ‘किन गांग’ की पाकिस्तान की यात्रा के दो दिन बाद ही हुई है. एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘किन’ ने शाहबाज़ सरकार से राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन इमरान की गिरफ्तारी से पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और भी बढ़ गई है.

चीनी विदेशमंत्री ने क्या कहा था?
चीन के विदेश मंत्री ‘किन गांग’ एससीओ के बैठक के बाद सीधे पाकिस्तान में विदेशमंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुंचे थे. उन्होंने वहां, राजनीतिक अस्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की थी. पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के साथ बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में किन ने कहा, ‘हमें पूरी उम्मीद है कि पाकिस्तान के सभी राजनीतिक दल देश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखेंगे और घरेलू और बाहरी चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटेंगे ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर फोकस किया जा सके.’

इमरान की गिरफ्तारी चीन की अवहेलना?
चीनी विदेश मंत्री की यात्रा के दिन के बाद ही इमरान खान की गिरफ़्तारी हुई हुई है. इसके बाद से कई कयास लगाए जा रहे हैं- पहला कि गिरफ्तारी के बाद से गृहयुद्ध की स्थिति बन गई है, दूसरा- राजनीतिक स्थिरता पर चीन की अपील की अवहेलना, तीसरा- स्थिति ऐसे ही बरकरार रही तो देश में विदेशी निवेश की संभावना न के बराबर हो जाएगी और चौथा सबसे महत्वपूर्ण- अगर पाकिस्तान को चीन या आईएमएफ से मदद नहीं मिलती है तो ये देश जल्द ही डिफ़ॉल्टर हो सकता है. 

सबसे ज्यादा कर्ज चीन का है
मालूम हो कि पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर कर्ज चीन का है, जबकि कुल वैश्विक कर्ज 126 अरब अमेरिकी डॉलर है. ये राशि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के फरवरी 2023 तक के कर्ज से तीन गुना है. वहीं, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के कुल कर्ज से भी काफी अधिक है. CPEC के बाद से चीन का पाकिस्तान के ऊपर कर्ज का जाल बढ़ते चला गया है. लेकिन इसके बाद भी चीन पाकिस्तान का हिमायती रहा है. वहीं, पाकिस्तान सरकार के पूर्व सलाहकार और नीति विशेषज्ञ मुशर्रफ जैदी का कहना है कि चीन ने पाकिस्तान के कर्ज को बड़े पैमाने पर माफ करने के बजाय रोलओवर करने का फैसला किया. चीन इस कदम से पाकिस्तान को संदेश देना चाहता था कि हम आपकी मदद करेंगे लेकिन आप देश में जारी सियासी उथलपुथल से बेहतर ढंग से निपटें.

डिफॉल्ट पर मूडीज की वार्निंग
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेटिंग एजेंसी ने बताया कि पाकिस्तान को 2023 के जून के अंत तक 3.7 बिलियन डॉलर कर्ज चुकाना होगा. लेकिन पाकिस्तान बिना आईएमएफ की मदद के शायद ही कर्ज का भुगतान कर पाएगा. कर्ज ना चुका पाने की स्थिति में पाकिस्तान डिफॉल्ट हो सकता है. वहीं, पाकिस्तान कर्ज की अदाएगी और डिफॉल्ट से बचने के लिए बार बार आईएमएफ से कर्ज के लिए गुहार लगाते रहा है. लेकिन, आईएमएफ ने अभी तक बेलआउट पैकेज नहीं जारी किया है. अगर पाकिस्तान की राजनीतिक हालत नहीं सुधरते हैं, तो स्थिति और भी काफी बिगड़ सकती है. 

चीन को क्या फायदा?
पाकिस्तान में जारी आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता चीन के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि चीन ने पाकिस्तान में भारी भरकम निवेश किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने CPEC प्रोजेक्ट पर लगभग 60 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन जैसे विवादित क्षेत्रों से होकर गुजरता है. यह प्रोजेक्ट चीन के शिनजियांग प्रांत को ईरान के पास अरब सागर तट पर स्थित ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है. इस प्रोजेक्ट की मदद से चीन काराकोरम हाइवे से गुजरते हुए अरब सागर तक पहुंच जाएगा. 

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Author: Up Head Line

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