
इम्फाल. तिदिम रोड के किनारे टूटे हुए शीशे के टुकड़े और जले हुए वाहनों के साथ दुकानों के शटर बीते 3 मई से मणिपुर के चुराचांदपुर शहर में फैली अशांति की कहानी बयां कर रहे हैं. यह चुराचांदपुर शहर ही था जहां अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के खिलाफ एक आदिवासी छात्रों के समूह की तरफ से निकाली गई एक रैली के दौरान पहली बार हिंसा भड़की थी. हिंसा जल्द ही बढ़ गई और इसने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया. मुख्य रूप से मेइती और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें कम से कम 52 लोग मारे गए. घटना के बाद कस्बे में कर्फ्यू लगा दिया गया.
3 मई के बाद केवल दूसरी बार रविवार को कर्फ्यू में कुछ घंटों के लिए ढील दी गई थी. हालांकि, शनिवार से कस्बे में शांति है, जब कर्फ्यू में शाम को पहली बार कुछ घंटों के लिए ढील दी गई थी, लेकिन तनाव फिर भी बना हुआ है क्योंकि मेइती लोगों के खिलाफ प्रतिक्रिया के रूप में हिंसा की आशंका बनी हुई है, जो मणिपुर की आबादी का 53 प्रतिशत हैं, लेकिन इस जिले यह समुदाय अल्पसंख्यक है.
एक वरिष्ठ प्रशासक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘अब तक लगभग 5500 लोगों को चुराचांदपुर में उनके घरों से निकाला जा चुका है, जिनमें ज्यादातर मेइती हैं. उन्हें वर्तमान में जिले भर में चल रहे चार राहत शिविरों में रखा गया है. यही वर्तमान में इन फंसे हुए लोगों का ठिकाना है, जो शहर में विवाद और तनाव का मुख्य कारण हैं.’
इसी तरह मेइती बहुल इंफाल में कुकी समुदाय के हजारों लोगों को शहर भर के राहत शिविरों में रखा जा रहा है. छात्र नेता डी जे हाओकिप ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘मुख्य बात यह है कि हम चाहते हैं कि इंफाल में लोग सुरक्षित अपने घर वापस पहुंचे. ऐसा नहीं है कि हम यहां के मेइती लोगों को चोट पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन हम नहीं चाहते कि उन्हें तब तक इंफाल वापस भेजा जाए जब तक कि हमारे लोगों को वापस नहीं लाया जाता.’
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Tags: Manipur
FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 10:00 IST








