Madhubani News : यह गलती करने पर किसानों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ, खेत को भी होगा नुकसान

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


राजाराम मंडल/ मधेपुरा.हाल ही में मधुबनी जिले के डीएम अरविन्द कुमार वर्मा की अध्यक्षता में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर अंतर विभागीय कार्य समूह की बैठक आयोजित की गई थी. इसमें डीएम ने फसलों के अवशेष को खेतों में नहीं जलाने तथा फसलों के अवशेष को खेतों में जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. साथ ही जितने भी विभाग के अधिकारी वहां मौजूद थे, उन्हें पूरी गंभीरता से कार्य करने का निर्देश दिया गया. कहा गया कि जो किसान ऐसा करते हैं उन्हें इसके नुकसान के बारे में बताया जाए. साथ ही जो किसान निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनको आने वाले तीन साल तक कृषि विभाग से कोई भी लाभ नहीं मिलेगा.

व्यापक रूप से करवाया जाए प्रचार-प्रसार

डीएम श्री वर्मा ने कहा कि खेत में पराली नहीं जलाने को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार करवाया जाए, ताकि लोगों में जागरूकता फैले. साथ ही उन्होंने किसान चौपालों में कृषि वैज्ञानिकों की उपस्थिति में किसानों को फसल या फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और पराली प्रबंधन की जानकारी देने का निर्देश दिया. डीएम ने कहा कि अब क्षेत्र के लगभग हर विद्यालय में बच्चों को फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी को भी फसल प्रबंधन और खेती की जानकारी हो पाए.

पराली जलाने से समाप्त हो जाती है खेत की उर्वरा शक्ति

जिलाधिकारी ने बताया किकृषि विभाग की ओर से कई कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसान खेतों में फसल अवशेष को ना जला कर उसे यंत्र द्वारा खाद के रूप में उपयोग कर सकें. उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ने के कारण मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु, केचुआ आदि मर जाते हैं. साथ ही जैविक कार्बन, जो पहले से हमारी मिट्टी में कम है और भी जलकर नष्ट हो जाता है. फलस्वरुप मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है. उन्होंने कहा कि एक टन पुआल जलाने से वातावरण को होने वाले नुकसान के कारण हमारा स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है.

Tags: Bihar News, Madhubani news

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें