
विजय राठौड़/ग्वालियर: ग्वालियर फोर्ट सदैव से ही लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. यहां विभिन्न शैलियों में निर्मित इमारतें लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. इसी प्रकार की एक इमारत जिसे विदेशी शैली में निर्मित किया गया है, आज भी अपने वजूद पर कायम है. इसे देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक आते हैं.
इतिहासकारों की मानें तो इसे बारूद खाना के नाम से जाना जाता है, जहां अंग्रेज अपने हथियारों का जखीरा रखते थे. ग्वालियर दुर्ग में स्थित शाहजहां व जहांगीर महल के सामने एक विशाल विदेशी इमारत है. इसका निर्माण विदेश शैली पर आधारित है. गुजरी महल के उपसंचालक पीसी महोबिया ने बताया कि इतिहास के पन्नों में यह इमारत बारूद खाना के नाम से दर्ज है. इस इमारत का निर्माण अंग्रेजों ने कराया था.
बेहद मजबूत और खंभों पर बनी यह इमारत देखने में काफी आकर्षक है. वर्तमान में इस इमारत का कुछ हिस्सा जर्जर हो गया है, लेकिन इसके बावजूद इसकी खूबसूरती अब भी कम नहीं हुई है. शाम के समय इस इमारत की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. इमारत के सामने बने जौहर कुंड में भरे जल में जब इस इमारत का प्रतिबंध नजर आता है, तो यह दृश्य काफी मनमोहक नजर आता है.
200 साल पहले बनी थी इमारत
इतिहासकारों की मानें तो जब अंग्रेजों ने यहां पर अपना शासन स्थापित किया था, तब उस समय यहां के महल बेहद वैभवपूर्ण थे. इनमें अंग्रेज अधिकारियों व खास मेहमान रुकते थे और कुछ महलों को कैद खाने के रूप में भी तब्दील कर दिया गया था. इस दौरान लगभग 200 वर्ष पूर्व इस इमारत को निर्मित किया गया था. इसमें विशेष प्रकार के लड़ाकू हथियारों को रखा जाता था एवं सुरक्षा के लिए कर्मचारी भी निवास करते थे.
इसलिए कहा गया बारूद खाना
इस इमारत को मजबूत ऊंचे-ऊंचे खंभों पर बनाया गया है, ताकि स्पेस अधिक मिल सके. हथियारों जैसे बड़ी-बड़ी तोप, बंदूकें, तलवार आदि यहां रखी जाती थी. इसके अलावा इसकी छत भी काफी ऊंची बनाई गई थी, ताकि हवा भी गुजरती रहे और विस्फोट इत्यादि होने की संभावना कम हो. इस इमारत में बहुत अधिक मात्रा में हथियारों के साथ-साथ बारूद भी रखा जाता था. इसे तभी से बारूद खाना के नाम से जाना जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 06, 2023, 18:14 IST








