चक्र क्या हैं? किस चक्र का क्या है नाम? ज्योतिषाचार्य से जानें इनका महत्व

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हाइलाइट्स

सहस्त्रार चक्र को मनुष्य के शरीर में शुद्ध चेतना का चक्र माना जाता है.
आज्ञा चक्र मनुष्य की दोनों भौहों के मध्य में स्थित होता है.

Body Chakras : हमने अक्सर लोगों को शरीर के सात चक्रों के बारे में बात करते हुए सुना है. हमारे शरीर में मूलतः सात चक्र होते हैं. इन चक्रों को मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्त्रार बोला जाता है. धार्मिक पुराणों के अनुसार जीवन की ऊर्जा इन्हीं 7 चक्रों में समाहित होती है. माना जाता है कि अगर इन सात चक्रों का कोई मनुष्य ठीक से प्रबंध कर ले तो वह असाधारण सफलता भी आसानी से प्राप्त कर सकता है. सांसों पर नियंत्रण और ध्यान से इस ऊर्जा को शरीर में खींचा जा सकता है. जैसे-जैसे ये ऊर्जा चक्र से ऊपर उठती जाती है. हमारे व्यक्तित्व में चमत्कारी परिवर्तन दिखने लगता है. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं, शरीर के इन सातों चक्र के बारे में.

चक्र क्या है ?
प्राचीन काल के ग्रंथों से पता चलता है कि चक्रों की उत्पत्ति प्राचीन हिंदू और बौद्ध परंपराओं से हुई है. चक्र मानव शरीर के भीतर मौजूद ऊर्जा के केंद्र हैं. सात चक्र हमारे पूरे शरीर में स्थित होते हैं. जो हमारी रीढ़ के आधार से शुरू होकर हमारे सिर के शीर्ष तक जाते हैं. प्रत्येक चक्र की अपनी अलग कंपन आवृत्ति होती है, और ये प्रत्येक चक्र शरीर में विशिष्ट कार्यों को नियंत्रण करते हैं. ये चक्र हमारे शरीर के रोगों के प्रतिरोध से लेकर भावनात्मक प्रसंस्करण तक हर चीज को प्रभावित कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें – रुके धन की प्राप्ति के लिए रामबाण है हरसिंगार के फूल, जाग उठेगी रुठी किस्मत, बनने लगेंगे हर बिगड़े काम

7 चक्रों के नाम
-मूलाधार चक्र
मूलाधार या मूल चक्र मनुष्य की प्रवृत्ति, सुरक्षा, अस्तित्व और मौलिक क्षमता से संबंध रखता है. ये चक्र गुप्तांग के बीच में होता है. ऐसा माना जाता है, कि जब किसी मनुष्य का अस्तित्व खतरे में होता है. तो मरने या मारने का दायित्व इसी चक्र का होता है.

-स्वाधिष्ठान च्रक
स्वाधिष्ठान चक्र मनुष्य के कमर के पीछे की तिकोनी हड्डी में होता है. स्वाधिष्ठान चक्र को आमतौर पर मूत्र तंत्र से संबंधित माना जाता है. स्वाधिष्ठान चक्र का मुख्य संबंध हिंसा, व्यसनों, मौलिक भावनात्मक आवश्यकताएं और सुख होते हैं.

-मणिपुर चक्र
मणिपुर चक्र चयापचय और पाचन तंत्र से संबंधित होता है. ये चक्र मनुष्य के नाभि स्थान पर व्यवस्थित होता है. ये चक्र पाचन क्रिया में शरीर के खाद्य पदार्थों को ऊर्जा के रूप में रूपांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.

-अनाहत चक्र
अनाहत या अनाहत पुरी चक्र का संबंध मनुष्य की बाल्यग्रंथि से होता है. ये चक्र मनुष्य के सीने में स्थित होता है. बाल्यग्रंथि प्रतिरक्षा प्रणाली का तत्व है. ये चक्र तनाव के प्रतिकूल प्रभाव से मनुष्य का बचाव का काम करता है. शारीरिक रूप से अनाहत चक्र संचालन को नियंत्रित करता है. भावनात्मक रूप से अपने और दूसरों के लिए समर्पित प्रेम मानसिक रूप से आवेश और आध्यात्मिक रूप से समर्पण को नियंत्रित करता है.

-विशुद्ध चक्र
विशुद्धि चक्र मनुष्य के गले में स्थित होता है ये चक्र मनुष्य की थायराइड और हार्मोन को कंट्रोल करने का काम करता है. इसी चक्र की मदद से मनुष्य का विकास होता है, और परिपक्वता आती है. ये चक्र आत्मविभक्ति और संप्रेषण जैसे कार्यों को नियंत्रित करता है.

-आज्ञा चक्र
आज्ञा चक्र मनुष्य की दोनों भौहों के मध्य में स्थित होता है. आज्ञा चक्र का मुख्य कार्य उच्च और निम्न को संतुलित करना है. मानसिक रूप से आज्ञा चक्र मनुष्य की दृश्य क्षमता के साथ जुड़ा होता है, और भावनात्मक रूप से शुद्धता के साथ सहज ज्ञान के स्तर से जुड़ा होता है.

यह भी पढ़ें – क्या सच में अशुभ है बिल्ली का रास्ता काटना, क्यों जोड़ा जाता है अपशगुन से, यहां जाने अंधविश्वास की असली वजह

-सहस्त्रार चक्र
सहस्त्रार चक्र को मनुष्य के शरीर में शुद्ध चेतना का चक्र माना जाता है. ये हमारे मस्तिष्क के बीच में ऊपर की ओर स्थित होता है. ये चक्र आंतरिक बुद्धि और दैहिक मृत्यु से जुड़ा हुआ होता है.

Tags: Astrology

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें