Insects and Animals: अजीब से दिखने वाले कीड़े दरअसल जानवर होते हैं. क्या, आप उनकी अजीब सी उभरी हुई आंखों और शरीर की संरचना के कारण ये मानने को तैयार नहीं हैं? विज्ञान कहता है कि उनके इस स्वरूप के बाद भी कीड़े जानवर ही होते हैं. दरअसल, कीड़े धरती पर जानवरों के साथ एनिमेलिया किंगडम साझा करते हैं. लिहाजा, कीड़े भी जानवर ही हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, कीड़े बहुत पहले ही स्तनधारियों और बाकी जानवरों से अलग हो गए थे. उनका अनुमान है कि इंसानों और कीटों के अंतिम सामान्य पूर्वज 50 करोड़ साल पहले रहते थे. हालांकि, ये स्थापित धारणा है कि कीड़े इंसानों से बहुत अलग होते हैं.
वैज्ञानिकों ने कीड़ों, जानवरों और इंसानों के बीच संबंध का पता लगाने के लिए फाइलोजेनी का इस्तेमाल किया. ये विकासवादी इतिहास और विभिन्न प्रजातियों या जीवों के समूहों के बीच संबंधों का अध्ययन करने में इस्तेमाल किया जाता है. फाइलोजेनी वैज्ञानिकों को धरती पर जीवन के जटिल टेपेस्ट्री को उजागर करने में मदद करता है. यही नहीं, फाइलोजेी की मदद से वैज्ञानिक सभी जीवित और विलुप्त प्रजातियों के बीच असंख्य संबंधों का पता लगा सकते हैं. फाईलोजेनेटिक विश्लेषण के जरिये वैज्ञानिक प्रजातियों की उत्पत्ति, विविधीकरण और आपसी संबंधों की जानकारी हासिल करते हैं. यह जैविक विकास के व्यापक पैटर्न की पहचान करने में भी मदद करता है.
फाइलोजेनेटिक विश्लेषण कैसे करता है मदद
जीवों के बीच विकासवादी संबंधों को अक्सर शाखाओं वाले आरेखों के रूप में दर्शाया जाता है, जिन्हें फाइलोजेनेटिक ट्री या क्लैडोग्राम कहा जाता है. ये ट्री साझा विशेषताओं और आनुवांशिक जानकारी के आधार पर अनुमानित संबंधों को दर्शाते हैं. हर शाखा बिंदु एक सामान्य पूर्वज का प्रतिनिधित्व करता है. शाखाओं की युक्तियां अध्ययन की जा रही प्रजातियों या समूहों का प्रतिनिधित्व करती हैं. शाखाओं की लंबाई समय के साथ विकासवादी परिवर्तन का संकेत दे सकती है. फाइलोजेनेटिक विश्लेषण में जीवों की शरीर संरचना, अंग या अन्य भौतिक लक्षण, डीएनए या प्रोटीन अनुक्रम और व्यवहारिक लक्षण शामिल हैं. यह ज्ञान जैव विविधता को संरक्षित करने, बीमारी से लड़ने और प्राकृतिक दुनिया के रहस्यों को उजागर करने में मदद कर सकता है.
में चिटिन, पैर, एंटीना और अन्य विशेष संरचनाओं से बने एक्सोस्केलेटन की विशेषता पाई जाती है.
आर्थ्रोपोड्स क्या होते हैं, कैसे होते हैं जानवर
आर्थ्रोपोड्स अकशेरूकीय जानवरों का बड़ा समूह है. इनमें चिटिन, पैर, एंटीना और अन्य विशेष संरचनाओं से बने एक्सोस्केलेटन की विशेषता पाई जाती है. आर्थ्रोपोड ग्रीक शब्द है. इसमें आर्थ्रोन का मतलब संयुक्त और पोडोस का मतलब पैर से है. इस संघ में कनखजूरे, बिच्छू, मकड़ी और केकड़े भी शामिल हैं. आर्थ्रोपोड पृथ्वी पर जानवरों का सबसे विविध समूह है. इसमें एक लाख से ज्यादा प्रजातियां हैं, जो सभी ज्ञात पशु प्रजातियों का लगभग 80 फीसदी है.
इंसेक्टा क्लास में आते हैं इंसेक्ट्स
आर्थ्रोपोड्स के सबसे बड़े और विविध समूह में चींटियां, भृंगी, तितलियां और मधुमक्खियां जैसी प्रजातियां शामिल हैं. आम तौर पर इनके शरीर के तीन मुख्य हिस्से सिर, छाती व पेट, छह पैर और पंखों के एक या दो जोड़े होते हैं. ये स्थलीय से लेकर जलीय वातावरण और ध्रुवीय से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक पाए जाते हैं. वहीं, अरचिंड्स समूह में मकड़ियां, बिच्छू, टिक और घुन शामिल हैं. अरचिंड्स में शरीर के दो मुख्य हिस्से सेफलोथोरैक्स और पेट के साथ चार जोड़े पैर होते हैं. कीड़ों की तरह इनके पंख या एंटीना नहीं होते हैं.
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जलीय आर्थ्रोपोड्स में कौन आते हैं
क्रस्टेशियंस मुख्य रूप से जलीय आर्थोपोड हैं, जिनमें केकड़े, झींगा मछली, झींगा और बार्नाकल प्रजातियां शामिल हैं. उनके शरीर के दो मुख्य हिस्से सिफलोथोरैक्स और पेट होते हैं. मिरियापोड्स समूह में सेंटीपीड और मिलीपेड शामिल हैं. मिरियापोड्स में कई पैरों के साथ खंडित शरीर होते हैं. हर खंड में आमतौर पर एक या दो जोड़े पैर होते हैं. आर्थ्रोपोड पारिस्थितिक तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं. ये परागणकों, डीकंपोजर और अन्य जानवरों के लिए खाद्य स्रोतों के तौर पर काम करते हैं. कुछ प्रजातियां कृषि कीटों या रोगों के लिए वैक्टर का काम करती हैं.
आर्थ्रोपोड्स के अरचिंड्स समूह में मकड़ियां, बिच्छू, टिक और घुन शामिल हैं.
क्या कायापलट भी कर लेते हैं कीट
वैज्ञानिकों के मुताबिक, कीट अपने विकास के दौरान कायांतरण नाम की प्रक्रिया से गुजरते हैं, जहां वे अलग-अलग रूपों और कार्यों के साथ विभिन्न जीवन चरणों में अपने स्वरूप में बदलाव करते हैं. कीट मानव गतिविधियों पर भी अहम असर डाल सकते हैं. शहद बनाने वाली मधुमक्खियां फसलों को परागित करती हैं. इसके उलट मानवीय गतिविधियों ने दुनिया भर में कीटों की आबादी को बुरी तरह से प्रभावित किया है. इससे कीटों की कई प्रजातियों में गिरावट के कारण पारिस्थितिक संतुलन में गड़बड़ी पैदा हुई है.
इंसानों ने कीटों को कैसे नुकसान पहुंचाया
मनुष्यों ने शहरीकरण, कृषि और वनों की कटाई करके कीटों के आवासों को काफी नुकसान पहुंचाया है. प्राकृतिक आवास नष्ट होने से कीटों की आबादी में कमी आई है. कृषि में कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का भी कीट आबादी पर असर पड़ा है. कृषि कीटों को नियंत्रित करने और पैदावार बढ़ाने में मदद करने वाले कीटनाशक गैर-लक्षित कीट प्रजातियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं, कीटनाशक पर्यावरण में जमा होकर कीड़ों के लिए दीर्घकालिक जोखिम पैदा करते हैं. इससे जैव विविधता में कमी और खाद्य श्रृंखलाओं में गड़बड़ी पैदा होती है. जीवाश्म ईंधन के जलने और वनों की कटाई से जलवायु परिवर्तन का पारिस्थितिक तंत्र पर असर पड़ता है. जलवायु परिवर्तन कीट आबादी को हर तरह से प्रभावित करता है.
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Tags: Animals, New Study, Research, Science facts, Science news
FIRST PUBLISHED : May 05, 2023, 21:33 IST








