कौशाम्बी
जमीयत उलेमा जिला कौशांबी द्वारा आयोजित पंद्रह दिवसीय कार्यक्रम (शोहदा इस्लाम व शोहद ए कर्बला) का चौथा जलसा जामिया मस्जिद महगांव जीटी रोड वाली में मगरिब की नमाज के बाद जमीयत उलेमा के सदस्य जनाब हाफिज जसीमुद्दीन की अध्यक्षता में हुवा!*
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुवा और रिजवान भाई ने बारगाह-ए-रिसालत में नात पेश की और निज़ामत के फार्ज मुफ्ती मुहम्मद मुज्तबा कासमी साहब ने निभाया!
*जमीयत उलमा जिला कोशांबी के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मुहम्मद मुरशिद कासमी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम का पूरा इतिहास शहादत के मुतवालियों से भरा हुआ है, और कर्बला के शहीदों की घटना एक बहुत ही दर्दनाक घटना है, और हजरत हुसैन र. वह व्यक्ति है, जिसके बारे में हम सभी के आका श्री मुहम्मद, स. ने कहा: ( हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से हूं ) और हुसैन वह है जो मेरे पैगंबर की गोद में खेलते थे, अौर हुसैन वह है जिसके कारण मेरे पैगंबर उपदेश देना बंद कर देते थे, जिसके कारण वे सजदा को लंबा कर देते थे, अौर जब मेरे हुसैन को प्यास लगती थी तो वह तड़प कर उठ जाते थे, और जब रोने की आवाज सुनते थे तो बेचैन हो जाते थे, और हुसैन वही हैं जिनके बारे में सहाबा कहते हैं! हज़रत हसनैन करीमैन के शरीर का आधा हिस्सा हमारे पैगंबर के पवित्र शरीर के समान था, और जब हज़रत हसनैन, हमारे सामने होते ऐसा लगता था कि हम अपने पैगंबर को देख रहे हैं! इसलिए हुसैन (र.अ.) ने कर्बला के मैदान में सजदा करते समय अपना सिर काटा दिया और पूरी उम्मत को, क़यामत के दिन तक आने वाले लोगों को संदेश दिया: ऐ लोगों, उन्हें मार डालो, उनके सिर काट दिए जाऐं, लेकिन झूठ के आगे, ज़ालिम के सामने कभी न झुकना, ज़ुल्म का समर्थन न करना, और किसी भी हालत में नमाज़ न छोड़ना, जब तक तुम्हारे शरीर में जान बाकी है, तब तक नमाज़ अदा करते रहो!*
और फिर मुफ्ती मुहम्मद मुजतबा कासमी साहिब ने इस महीने की फजीलत और महत्ता पर रोशनी डाली, मुहर्रम और आशूरा और जमीयत उलेमा हिंद के इतिहास पर!
*इस अवसर पर मौलाना मुफ्ती मुहम्मद मुजतबा साहब कासमी, मौलाना मुफ्ती मुहम्मद मुरशिद कासमी,मौलाना मुहम्मद शरीफ कासमी,हाफिज़ कलीम और जनाब हाफिज़ जसीमुद्दीन साहब की दुआ के साथ जलसा समाप्त हुवा !*








