
रवि पायक/ भीलवाड़ा. हम आपको भीलवाड़ा शहर के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी स्थापना स्थानीय भक्तों द्वारा करवाई गई. हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा शहर आर के कॉलोनी में स्थित श्री शिव साईं मंदिर की. इस मंदिर की एक खासियत यह है कि जिस तरह शिरडी साईं बाबा के मंदिर में पूजा पाठ किया जाता है उसी तर्ज पर भीलवाड़ा शहर के इस मंदिर में भी श्रृंगार पूजा अर्चना की जाती हैं. यही नहीं यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी होती है. यहां पर कुछ चमत्कार ऐसे भी हुए जिससे लोग दूर-दूर से यहां पर दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
भीलवाड़ा शहर के आर के कॉलोनी में स्थित सिविल लाइंस में श्री शिव साईं मंदिर के पुजारी राजेश कहते है कि यह मंदिर कई वर्षों पुराना है. इस मंदिर की स्थापना यहां के स्थानीय भक्त और पांच दोस्तों ने मिलकर करवाई थी. यहां पर पहले छोटी मूर्ति की स्थापना की गई थी और बाद में सभी भक्तों द्वारा मिलकर यहां पर एक बड़ी प्रतिमा की स्थापना करवाई गई. इस मंदिर में जिस तरह शिरडी साईं बाबा मंदिर में पूजा पाठ किया जाता है उसी तर्ज पर भीलवाड़ा शहर के इस मंदिर में भी श्रृंगार पूजा अर्चना की जाती हैं. यहां दर्शन करने से यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है.
इस मंदिर को चमत्कारी माना जाता है. यहां पर दर्शन करने के लिए लोग दूर- दूर से पहुंचते हैं. पुजारी का कहना है कि करीब 40 दंपति भक्त यहां पर ऐसे आए जिनको चिकित्सकों ने भी मना कर दिया कि उनकी कोई संतान नहीं होगी मगर इस मंदिर में दर्शन करने से उन्हें संतान हुई है. यहां पर दर्शन करने से हर कुवांरे युवक-युवती की भी शादी हो जाती है. जिसके बाद वह अपनी शादी का न्योता देने के लिए साईं बाबा के पास भी कंकू पत्री लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में साईं बाबा की प्रतिमा का ऐसा चमत्कार है कि यहां पर पैरालिसिस मरीजों का भी इलाज हो जाता है. जो भी भक्त यहां पर अपने दुख और पीड़ा लेकर साईं बाबा के पास पहुंचता है साईं बाबा उनकी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं.
गुरुवार के दिन यहां पर हजार लोगों के लिए प्रसाद का निर्माण करवाया जाता है और वितरित किया जाता है और अन्य दिनों पर 100-200 लोग यहां पर दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. वहीं दूसरी तरफ राजेश गिधवानी कहते हैं कि भीलवाड़ा शहर के आर के कॉलोनी में स्थित श्री शिव साईं मंदिर में चाहे गर्मी हो या बारिश या फिर सर्दी का दौर मौसम के अनुरूप भगवान श्री साईं बाबा का अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : June 08, 2023, 19:21 IST








