Railway Knowledge: ट्रंक, मेन और ब्रांच लाइन, क्या होता है इनमें अंतर, ट्रेन की स्पीड से क्या है सम्बंध

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हाइलाइट्स

ट्रंक लाइन चारों महानगरों को 6 आपस में जोड़ती है.
इसके बाद की बची प्रमुख लाइन्स को मेन लाइन कहते हैं.
ब्रांच लाइन छोटे-छोटे सेक्शंस से मेन लाइन तक आती है.

नई दिल्ली. आपने पिछले कुछ दिनों में मेन लाइन और लूप लाइन का खूब जिक्र सुना होगा. तमिलनाडु से पश्चिम बंगाल जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस मेन लाइन की बजाय लूप लाइन पर जाकर ही मालगाड़ी से टकराई थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर मेन लाइन होती क्या है. मेन लाइन के अलावा भी इसके 2 और वर्ग हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि इनमें से एक लूप लाइन है तो आप गलत हैं. लूप लाइन का काम बस स्टेशन के आसपास ही होता है. यह 3 प्रमुख लाइनों का हिस्सा नहीं है. भारतीय रेलवे ने लाइनों को जिन 3 वर्गों में बांटा हैं. वह इस प्रकार हैं- ट्रंक लाइन, मेन लाइन और ब्रांच लाइन.

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर इन तीनों लाइनों में फर्क क्या है. क्या गाड़ियों की स्पीड पर इन लाइनों के आधार पर तय होती है. अगर हां, तो किस लाइन पर कितनी स्पीड की अनुमति मिलती है. तो आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

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ट्रंक लाइन
भारत के चार महानगरों, दिल्ली, कोलकाता (हावड़ा), चेन्नई और मुंबई को मिलाकर एक स्वर्णिम चतुर्भुज बनता है. गया के रास्ते दिल्ली से कोलकाता, विशाखापट्टनम के रास्ते कोलकाता से चेन्नई, रायचूर के रास्ते चेन्नई से मुंबई और कोटा के रास्ते मुंबई से दिल्ली, इससे एक चतुर्भुज (क्ववाडिलेट्रल) तैयार होता है. इसके बीच में 2 और लाइनें आपस में एक दूसरे को काटती हैं. एक लाइन दिल्ली से चेन्नई, इटारसी के रास्ते और दूसरी मुंबई से कोलकाता, नागपुर के रास्ते जाएगी. इस तरह से ये 6 लाइनें मिलकर ट्रंक रूट बनाती हैं. हालांकि, 2000 के बाद एक दिल्ली से गुवाहाटी को भी ट्रंक रूट में शामिल कर लिया गया. यानी कुल सात रूट पर जो लाइने हैं उन्हें ट्रंक लाइन कहा जाता है. इन पर गाड़ियों की स्पीड अधिकतम होती है. इस पर गाड़ियां अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती हैं.

मेन लाइन
इसके अलावा जो भी मुख्य लाइनें बच जाती हैं उन्हें मेन लाइन कहा जाता है. ये लाइने ट्रंक लाइन से अलग होती हैं. ट्रंक लाइन का कोई भी हिस्सा इनमें नहीं आता है. उदाहरण के लिए दिल्ली से देहरादून मेन लाइन है. दिल्ली से अहमदाबाद एक मेन लाइन है. इन लाइनों पर स्पीड 100 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर नहीं जाती हैं.

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ब्रांच लाइन
छोटे-छोटे शहरों या इलाकों में स्थित स्टेशनों से रेल लाइनों को मेन लाइन तक लाने का काम ब्रांच लाइन करती हैं. मसलन एक ही राज्य के किसी जिले से वहां की राजधानी तक लाने वाली रेल लाइन ब्रांच लाइन हो सकती है. यह गाड़ी की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटे से कम ही रखी जाती है.

मेन लाइन और लूप
स्टेशन के पास गुजर रही लाइनों के संदर्भ में देखें तो मेन लाइन का मतलब थोड़ा बदल जाता है. ट्रेन जिस पटरी पर बिना रुके फुल स्पीड से स्टेशन को पार कर जाए वह मेन लाइन कहलाएगी. वहीं. ट्रैक चेंज करके वह जब प्लेटफॉर्म पर आती है तो लूप लाइन पर आती है. लूप लाइन की लंबाई 750 मीटर तक होती है. ट्रेन भी अमूमन इससे लंबी नहीं होती.

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Author: Up Head Line

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