
राहुल कौशिक/भीलवाड़ा. कहते हैं एक पिता और बेटी का रिश्ता कई मायनों में बहुत पवित्र माना जाता है. सनातन धर्म में जब एक बेटी घर में जन्म लेती है, तो कहा जाता है कि घर में लक्ष्मी का प्रवेश हुआ है. मगर जब घर की लक्ष्मी ही घरवालों को पहचानने से इंकार कर दे तो सोचिए माता पिता पर दुखों का कितना बड़ा पहाड़ टूटा होगा. 18 साल तक खून पसीना बहाकर माता पिता ने बेटी को पढ़ा लिखाकर उसे अपने पैरों पर खड़ा किया. उसी बेटी ने जब उन्हें पहचान से इंकार कर दिया तो पिता ने उसकी शोक पत्रिका छपवाकर समाज में बटवां दी. यह पत्रिका सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.
यह मामला है भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से 21 किलोमीटर दूर रतनपुरा गांव का है. गांव के रहने वाले भैरू लाल जाट ने अपनी बेटी को लाड़ प्यार से पढ़ा लिखाकर बड़ा किया. इसके साथ उसका रिश्ता भी तय किया. मगर कुछ कारणों से यह रिश्ता टूट गया. इसके बाद पिता ने अपनी पुत्री के लिए कई लड़के तलाशे. इस बीच परिवार वालों ने बेटी को अच्छी शिक्षा देने की कहकर उसकी शादी बाद में करवाने पर जोर दिया. इस पर पिता ने खून पसीना बहाकर उसे अच्छी तालीम दी. इसके बाद भी उसी बेटी अपने प्रेमी के साथ शादी करके थाने में अपने ही माता पिता को पहचान से इंकार कर दिया.
पिता का छलका दर्द
पिता भैरू लाल जाट ने कहा कि हमने नाजों से बेटी को पाल पोसकर बड़ा किया और उसकी सगाई भी की, लेकिन दूसरे पक्ष ने ही यह रिश्ता तोड़ दिया था. हमने उसके बाद बच्ची की अच्छी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया. कुछ दिनों पूर्व ही वह पहले जिससे सगाई की हुई उसी लड़के के साथ ही भाग गई. इसके बाद हमने लड़के के माता-पिता से भी बात की और दोनों की शादी के लिए भी राजी हो गए. मगर हमारे द्वारा कई बार कहने के बाद भी वह घर नहीं आए. इसके बाद सदर थाने में बुलाया गया, तो वहां पर हमारी बेटी ने हमें पहचानने से ही इंकार कर दिया. इसके कारण हम टूटकर रह गए. हमने मिन्नत भी की, लेकिन उस पर कोई भी असर नहीं पड़ा. इससे आहत होकर मैंने अपनी बेटी को मरा हुआ समझकर उसकी शोक पत्रिका छपवाई है.
वहीं, माता हेमलता जाट ने कहा कि सुबह वह हमीरगढ़ बैंक में जाकर रुपये जमा करवाने की बात कहकर घर से निकली थी. उसके बाद उसका फोन आया कि वह उसी लड़के के साथ जा रही है जिसके साथ पहले उसकी सगाई की थी. हमने काफी तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिली तो हम लड़के के घर वालों से मिले और रिती-रिवाज से शादी करने के लिए कहा. इस पर उन्होने हमें आश्वासन दिया, लेकिन थाने में जाकर सब पलट गए. साथ ही हमारी बेटी ने भी पहचान से इंकार कर दिया. लड़की मां ने रोते हुए कहा कि 18 साल तक खून पसीना बहाकर बेटी को बड़ा करने के बाद उस पर परिवार का कोई हक नहीं बनता है क्या?
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FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 19:01 IST








