
कैलाश कुमार/बोकारो. बोकारो के विभिन्न हिस्सों में रविवार को अच्छी फसल की कामना को लेकर रोहिणी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. यह पर्व मुख्य रूप से जेठ महीने में मनाया जाता है. जहां झारखंड के विभिन्न समुदाय के लोग अच्छी फसल की कामना के लिए इस दिन अपने घर और खेतों में जाकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. रोहिण पर्व के बाद किसान अपने खेतों में काम करना शुरू कर देते हैं.
ये है खास रस्म
रोहिणी पर्व के लिए महिलाएं और लड़कियां सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले घर की दीवारों पर गोबर के चिन्ह बनाती हैं. उसके पश्चात घर का प्रधान पुरुष सुबह स्नान कर अपने घर की मापक वस्तुएं जैसे पेछिया, पेइला को धोकर उसमें चावल के आटा ( गुड़ी ) के सिंधुर का टीका लगा कर विधिवत पूजा अर्चना करता है. इसके साथ ही कबूतर या बतख की बलि दी जाती है. सूर्यास्त के वक्त घर की कुंवारी लड़कियां खेत में जाकर खेतों में धूप, अगरबत्ती पूजा अर्चना कर टोकरी में मिट्टी उठाकर लाती हैं. इस क्रम में किसी से भी बात करने या टोकने की मनाही रहती है.
अषाढ़ी फल खाने की परंपरा
बोकारो के चास प्रखंड के नावाडीह पंचायत के 75 वर्षीय किसान हरिलाल महतो ने बताया कि रोहिणी पर्व मुख्य रूप से अच्छी फसल की कामना के लिए मनाया जाता है. इसके साथ ही सांप, बिच्छू और जहरीले जीव का घर पर प्रवेश ना हो इसलिए ईश्वर से रक्षा के लिए पूजन भी किया जाता है. साथ ही इसी दिन विशेष अषाढ़ी फल खाने की परंपरा होती है, जिसे मान्यता अनुसार खाने से साल भर विष का प्रभाव नहीं होता है. रोहिणी पर्व झारखंड की संस्कृति की पहचान है. इस पर्व के कारण किसान अपनी परंपराओं से जुड़े हुए हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 29, 2023, 17:47 IST








