सिर्फ भूख लगने का अहसास भी रोक सकता है एंटी एजिंग- रिसर्च

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें



क्या भूखे रहने या उपवास से कोई फायदा होता है. इस विषय पर भी कम शोध नहीं हुए हैं. उपवास के और उसके तरीकों पर कई तरह के फायदे नुकसान की चर्चा होती रहती है. लेकिन नए अध्ययन में सुझाया गया है कि ना खत्म होने वाली भूख का अहसास ही रुक-रुक कर किए उपवास पर एंटी एजिंग प्रभाव देखने को मिल सकते हैं इसके लिए जानवरों को भूखे रहने की जररूत भी नहीं होगी. इस अध्ययन में मक्खियों पर शोध कर देखा गया है कि जब उनमें भूखे रहने का भाव पैदा किया जाता है तो ज्यादा कैलोरी खाने के बाद भी वे लंबा जीवन जीती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के अध्ययन में मनोवैज्ञानिक स्कॉट प्लेचर ने बताया कि उन्होंने खुराक के पोषण संबंधी प्रभावों और सीमीत आहार के जीवन को लंबा करने के प्रभावों से अलग करने काम किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इतना ही पर्याप्त है केवल यही भाव रहे कि भोजन पर्याप्त नहीं है. लंबे समय तक उपवास करने की जगह रुक रुक का उपवास करना हाल के ही सालों में लोकप्रिय हो गया है. लेकिन उसके लाभ सीमित है और वह मुख्य तौर पर जानवरों के अध्ययनों पर आधारित हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) वैज्ञानिकों ने घरेलू मक्खियों (डअसोफिला मेलनोगास्टर) और कुतरने वाले जानवरों पर किए गए कार्यों से पता चला है कि कैलोरी की खपत पर सीमाएं लगाने से दीर्घायु हो सकते हैं और अच्छी सेहत बनी रह सकती है. लेकिन अभी इस शोध को इंसानों पर लागू करने के देखना बाकी है. उपवास की आणविक प्रणाली का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने घरेलू मक्खियों पर प्रयोग किए. मक्खियां इंसानों की तरह की 75 फीसद बीमारी संबंधी जीन्स साझा करती हैं और उनका मैटाबॉलिज्म और दिमाग स्तनपायी जानवरों से काफी मिलता जुलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) मक्खियों मे पेट भरने का अहसास जगाने में जरूर पोषक तत्व ब्रांच्ड चेन अमीनो एसिड या बीसीसीए होते हैं. इसलिए ज्यादा इस तरहके पदार्थ खाने से भूख का अहसास कम हो जाता है. इसका उम्र बढ़ने के संबंध जानने के लिए शोधकर्ताओं ने मक्खियों को कम बीसीएए वाला नाश्ता देकर भूखा रखा. उनकी भूख का अंदाजा उनके खाने की मात्रा से लगाया गया. कमबीसीएए वाली मक्थियों ने ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन अधिक खाया. यह तब होता है जब मक्खियां चाहत के आधार पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर खाती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) शोधकर्ताओं ने सीधे स्रोत पर ही ध्यान लगाया जब टीम ने उन तंत्रिकाओं को सक्रिय किया जो भूख के प्रति अनुक्रिया करती हैं. उन्होंने पाया कि ऐसे भूख के आधार खाने वाली मक्खियां ज्यादा लंबा जीवन जीती हैं. इस तरह से, जैसे की शोधकर्ताओं ने कहा, केवल भूख की प्रेरणादायक अवस्था ही उम्र बढ़ाने की प्रणाली को धीमा कर सकती है. और प्रयोगों में पाया गया कि खुराक में बीसीएए कम करने से भी मक्खियों में हिस्टोन नाम प्रोटोन को मदद मिलती है जो डीएनए से खुद को बांध कर जीन गतिविधि की नियंत्रित करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) शोधकर्ताओं को लगता है कि हिस्टोन खुराक से भूख की प्रतिक्रायओं और उम्र बढ़ने की प्रणाली से संबंधित हो सकते हैं. रोचक बात यह है कि पिछले अध्ययनों ने भी बढ़ते हिस्टोन को बढ़ते जीवनकाल से जोड़ा है. शोधकर्ताओं का लगता है कि लंबी भूख तंत्रिका सर्किट के हिस्टोन प्रोटीन में ऐसे बदलाव की प्रतिक्रिया हो सकती है जो उम्र ढलने की प्रक्रिया धीमी करती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) ये नतीजे यह व्याख्या करने में मदद कर सकते हैं कि क्यों कम बीसीएए खुराक हमारी खुद की सेहत के लिए अच्छी होती हैं. शायद वे शरीर को पर्याप्त पोषण देती है जबकि दिमाक के भूख के संकेतों को पूरी तरह से शांत नहीं करती. इसमें कोई शक नहीं इस विचार को और ज्यादा परीक्षण की जररूत है और मक्खियों पर एक अध्ययन काफी नहीं है. यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें