
रूस यूक्रेन युद्ध में सतह तौर पर भले ही रूस ताकतवर लगता है, हकीकत ऐसी है नहीं. छोटे से देश यूक्रेन पर अमेरिका और यूरोप अरबों डॉलर खर्च कर उसे हथियार दे रहे हैं जिससे रूस यूक्रेन को तबाह ना कर सके और खुद इस युद्ध में हार जाए. इस युद्ध में यूक्रेन की जीत नाटो, अमेरिका और यूरोप की जीत मानी जाएगी. अमेरिका की अगुआई में पश्चिमी देशों ने रूस को कमजोर करने के लिए युद्ध की शुरुआत से ही कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. इनसे रूस पर विपरीत असर भी हुआ है. लेकिन एक सवाल जो अब उठता है कि आखिर युद्ध के 450 दिन गुजरने के बाद भी रूस की स्थिति किसी भी तरह से कमजोर क्यों नहीं हुई है. अब तो जर्मन खुफिया एजेंसी ने इसकी पुष्टि कर दी है.
मजबूत बने हुए हैं पुतिन
जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी बीएडी के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का तंत्र अब भी बहुत मजबूत है और उसमें किसी तरह की कोई दरार तक नहीं आई है. डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक बर्लिन के फेडरल एकेडमी फॉर सिक्यूरीटी पॉलिसी में बीएनडी प्रमुख ब्रूनो काल ने ऐसा कहा है.
सबसे बड़ा सवाल
काल का यहां तक कहना है कि नए सैनिकों की भर्ती के साथ रूस युद्ध को अब लंबी खींचने में सक्षम हो गया है और उसके पास हथियारों की कोई कमी नहीं है. यह दावा यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर 15 महीने पहले पुतिन ने जब विशेष सैन्य अभियान के नाम पर यूक्रेन पर हमला बोला था, तब से नाटो के सहयोग से भले ही यूक्रेन टिका रहा हो, लेकिन रूस कमजोर क्यों नहीं हुआ जबकि उस पर तो पश्चिमी देशों ने अच्छे खासे प्रतिबंध लगाए थे.
संकेत तो ऐसे ही हैं
जर्मनी खुफिया एजेंसी का यह दावा कोई अनुमान नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज के प्रोफेसर और यूरोपीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर गुलशन सचदेवा भी इससे सहमति जताते हैं. उनके मुताबिक हालात और अभी मिल रहे संकेत तो बीएनडी के दावे को मजबूत ही करते दिख रहे हैं. प्रतिबंधों के बाद भी रूस की अर्थव्यवस्था कायम है, पुतिन के खिलाफ किसी तरह का बड़ा विरोध तक नहीं है.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 10:19 IST








