
अभिनव कुमार/दरभंगा. मखाना किसानों के साथ जिलेवासियों के लिए खुशखबरी है. लगभग 18 साल बाद मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा मिला है. अब राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा राष्ट्रीय स्तर पर मखाने का अनुसंधान और विकास कार्य करेगा, जिससे मखाना उत्पादक किसानों के साथ मखाना व्यवसायियों को लाभ मिलेगा. गौरतलब है कि राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा मिलने के बाद बिहार के मखाना उत्पादक किसानों के लिए एक बहुत ही बड़ी खुशखबरी है. खासकर मिथिलांचल क्षेत्र के मखाना किसानों के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.
2005 में छीना था राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र का दर्जा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने मिथिलांचल और सीमांचल के मखाना उत्पादकों के अनुरोध पर विचार करते हुए मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा की समाप्त की गई गरिमा को पुनः बहाल कर दिया है. अब यह संस्थान फिर से राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा के नाम से जाना जाएगा. गौरतलब है कि वर्ष 2002 में इस मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा मिला था, जिसको 2005 में हटा दिया गया था.
वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि 18 वर्षों का इंतजार खत्म हुआ. फिर से राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा मिलने से मिथिलांचल के लिए गर्व की बात है. यह स्टेटस मिल जाने के बाद यहां संसाधनों की उपलब्धता बढ़ जाएगी, भौतिक संसाधन बेहतर होंगे. शोध के लिए जो जरूरी उपकरण हैं और जो आधारभूत संरचनाएं हैं उसकी जरूरत होती है तो वह बेहतर हो जाएगी. हमारे पास फंड बेहतर होंगे, जो किसान मखाने की खेती से या इसके प्रसंस्करण से जुड़े हुए हैं उन सभी को हम बेहतर सेवा दे पाएंगे. अब किसानों को फायदा यह होगा, जो उनके लिए जरूरी योजनाएं हैं, उनके प्रशिक्षण के लिए उनको तकनीकी सहायता पहुंचाने के लिए हमारे पास बेहतर संसाधन होंगे. हमारे पास अच्छे लोग होंगे.
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FIRST PUBLISHED : May 25, 2023, 09:52 IST








