
शक्ति सिंह/ कोटा. आज के समय के कई किसान अब मुख्य फसलों को छोड़ बागवानी की तरफ रूख कर रहे हैं. वहीं कई किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर कृषि में नए-नए प्रयोग करके अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें सफल भी हो रहे हैं. आधुनिक तकनीक, नई फसल, सही शोध से कृषि व्यवसाय को नया रूप मिलने लगा है. कोटा जिले के छोटे से गांव पीपल्दा के रहने वाले भगवतसिंह भी ऐसे ही युवा किसान हैं. यहां यह भी दिलचस्प है कि भगवतसिंह का मुख्य पेशा वकालत है. वे वकालत करने के साथ—साथ आधुनिक खेती भी करते हैं.
एलएलबी करने के बाद भी खेती करने को लेकर भगवतसिंह ने बताया कि उनका सपना आरएएस अधिकारी बनने का था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई. हालांकि, इसके बाद उन्होंने एलएलबी कर वकालत शुरू की और वकालत के साथ-साथ खेती-बाड़ी भी करने लगे लगे. वे शुरुआत में परंपरागत खेती ही करते थे. लेकिन, परंपरागत खेती में मुनाफा कम होता था. इस वजह से उन्होंने परंपरागत खेती छोड़ हॉर्टिकल्चर की ओर रुख किया व उसके बारे में जानकारी ली. आज भगवसिंह का नाम कोटा जिले के प्रगतिशील किसानों में शुमार.
भगवतसिंह पहले वे पिताजी की जमीन पर पारंपरिक खेती करते थे. बाद में आधुनिक खेती की ओर रुख किया और धीरे-धीरे सफलता मिलती गई. भगवत बताते हैं कि आज वे कई तरीके की फसलें उगाते हैं. सीजन के हिसाब से इजराइली गेहूं, ऑर्गेनिक गेहूं और ब्लैक गेहूं भी. इसके साथ ही बागवानी करते हैं. वहीं सीजन के हिसाब से अलग—अलग सब्जियां उगाते हैं.
सालाना 20 लाख से ज्यादा की होती है कमाई
भगवतसिंह ने बताया कि खेती के लिए उन्होंने अपने 25 एकड़ खेत में ड्रिपिंग सिस्टम लगाया हुआ है. वे बूंद—बूंद सिंचाई करते हैं. खेती के सााि साथ ही पशुपालन भी करते हैं. पशुाओं से मिलने वाले गोबर से वे खुद ही आॅर्गेनिक खाद बनाते हैं. इसी खाद को वे खेतों में काम लेते हैं. भगवंतसिंह को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा उन्हें आधुनिक किसान के तौर पर राज्यस्तर पर सम्मानित भी किया गया था. भगवंतसिंह ने बताया कि वे फसलों, बागवानी एवं सब्जियों से सालाना 20 से 22 लाख रुपए कमा लेते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 17, 2023, 16:56 IST








