ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस के 5 ऐसे गढ़ हैं जिन्हें फतेह करना बीजेपी के लिए सपना बना हुआ है. 1990 की राम लहर, 2003 की उमा लहर, 2008 की शिवराज लहर और 2013 की मोदी-शिवराज लहर में भी बीजेपी को इन किलों पर मुंह की खानी पड़ी है. खुद शिवराज सिंह चौहान यहां हार का सामना कर चुके हैं. यही वजह है कि इन किलों पर चढ़ाई के लिए इस बार बीजेपी के शाह खुद सियासी बिछात बिछाएंगे. इन ग़ढ़ों पर जीत के सहारे ही बीजेपी 2023 में कामयाबी का रास्ता बना पाएगी.
शिवराज सिंह चौहान को एमपी बीजेपी में वन मैन आर्मी माना जाता है. मामा के नाम से मशहूर शिवराज ने लोकसभा से लेकर विधानसभा तक जीत का जलवा कायम रखा है. लेकिन क्या आप जानते हैं शिवराज खुद विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेल चुके हैं. 2003 की उमा लहर में शिवराज दिग्विजय सिंह का राघौगढ़ का किला भेदने मैदान में उतरे थे. लेकिन दिग्गी राजा के आगे शिवराज चुनाव हार गए थे. राघौगढ़ ही नहीं ग्वालियर-चंबल अंचल के 5 ऐसे किले हैं जिन्हें भेदना बीजेपी के लिए कहीं मुश्किल तो कहीं नामुकिन बना हुआ है. आइए आपको बताते है कौन से गढ़ है जिन्हें जीतना बीजेपी का सपना बना हुआ है.
किला नंबर 1- राघौगढ़ ( जिला गुना )
राघोगढ़ का किला जीतना आज भी बीजेपी के लिए सपना बना हुआ है. राघोगढ़ से 1990 और 1993 में लक्ष्मण सिंह जीते. 1998 और 2003- दिग्विजय सिंह जीते. 2003 के चुनाव में दिग्विजय सिंह ने तत्कालीन BJP प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान को करारी शिकस्त दी थी. 2008 में कांग्रेस के मूल सिंह जीते. 2013 और 2018 में जयवर्धन सिंह जीते.
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किला नंबर 2- लहार (जिला भिंड)
भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट भी कांग्रेस का वो किला है, जिसे बीजेपी बीते 33 साल से भेद नहीं पाई है. इस सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ. गोविंद सिंह अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं. गोविंद सिंह ने लहार सीट पर 1990 की राम लहर, 2003 की उमा लहर, 2008 की शिवराज लहर और 2013 की शिवराज- मोदी लहर के बावजूद कामयाबी दिलाई है. डॉ गोविंद सिंह ने सन 1990 से 2018 तक के सभी 7 विधानसभा चुनाव लगातार जीते हैं.
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किला नंबर 3 पिछोर ( जिला शिवपुरी )
कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है. इस सीट पर कांग्रेस के केपी सिंह बीते 30 साल से जमे हुए हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 6 चुनाव में केपी सिंह ने लगातार जीत दर्ज की हैं. बीजेपी कड़ी मशक्कत के बाद भी इस सीट पर जीत का सपना संजोए हुए हैं. केपी सिंह ने इस सीट पर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही उमा भारती के भाई स्वामी प्रसाद लौधी और समधी प्रीतम लोधी को भी हराया है. केपी सिंह ने पिछोर सीट पर 1993 से 2018 तक के लगातार छह विधानसभा चुनाव जीते हैं.
किला नंबर 4 भितरवार ( जिला ग्वालियर)
2008 में भीतरवार सीट के अस्तित्व में आने के बाद से बीजेपी के लिए ये सीट सपना बनी हुई है. इस पर कांग्रेस के लाखन सिंह यादव जमे हुए हैं. बीते एक दशक में शिवराज लहर और शिवराज मोदी लहर के बावजूद बीजेपी भितरवार में कांग्रेस के लाखन सिंह यादव को शिकस्त नहीं दे पाई है. 2013 और 18 में इस सीट पर कद्दावर नेता अनूप मिश्रा शिकस्त झेल चुके हैं. 2008 से लाखन सिंह यादव ने लगातार तीनों चुनाव जीते हैं.
किला नंबर 5 डबरा ( जिला ग्वालियर )
डबरा में पिछले डेढ़ दशक से कांग्रेस का कब्जा है. 2008 , 2013 और 2018 के तीन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की इमरती देवी ने जीत दर्ज कर कब्जा जमाया. 2020 के उपचुनाव में जब इमरती देवी सिंधिया के साथ दलबदल कर बीजेपी में गयीं. तब भी डबरा सीट कांग्रेस के खाते में गई. बीजेपी में जाकर इमरती देवी के हाथ से ये सीट निकल गयी. कांग्रेस के सुरेश राजे ने BJP के टिकट पर उतरी इमरती देवी को हराया था. आंकड़ों पर गौर करें तो डबरा सीट पर 2008, 2013, 2018 में कांग्रेस की इमरती देवी जीतीं. 2020 उपचुनाव में कांग्रेस के सुरेश राजे जीते.
बीजेपी को उम्मीद- इस बार कांग्रेस के गढ़ ढहा देंगे
इन सीटों पर इस बार बीजेपी नेता अमित शाह की नजर है. बीजेपी के आला नेताओं ने मंथन किया था उसमें ये निकलकर आया कि कांग्रेस के इन गढ़ पर बीजेपी वॉक-ओवर देने के हिसाब से कमजोर उम्मीद्वार उतारती है. यही वजह है कि जब बात शाह तक पहुंची तो इस बार इन सीटों पर उम्मीद्वार उनकी मोहर लगने के बाद तय होंगे. MP के उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाहा का कहना है जिन सीटों पर हमें लगातर हार का सामना करना पड़ा उन सीटों पर हम मजबूत उम्मीदवार उतारेंगे.
कर्नाटक चुनाव से उत्साह
इन पांच किलों पर लगातार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस कर्नाटक चुनाव नतीजों के बाद उत्साह से भरी है. कांग्रेस के मीडिया प्रदेश उपाध्यक्ष RP सिंह का दावा है. इन गढ़ों पर कब्जा तो बरकरार रहेगा साथ ही अब कांग्रेस बीजेपी के गढ़ों को जीतेगी. कांग्रेसियों का दावा है माहौल बीजेपी सरकार के खिलाफ है, लिहाजा कांग्रेस को ऐतिहासिक सफलता मिलेगी.
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Tags: Bjp madhya pradesh, Madhya Pradesh Assembly, Madhya Pradesh Congress, Madhya pradesh latest news
FIRST PUBLISHED : May 15, 2023, 19:13 IST








