फिल्मी कहानी से कम नहीं जूडो के ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’ रहे संजय जोशी की स्टोरी, हादसा भी नहीं तोड़ पाया हौसला

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वेद प्रकाश, ऊधम सिंह नगर: जूडो के इंटरनेशनल खिलाड़ी रहे संजय जोशी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जूडो के इंटरनेशनल खिलाड़ी और सीआईएसएफ के हेड कांस्टेबल रहे संजय जोशी 2001 में साउथ अफ्रीका में आयोजित जूडो इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद दिल्ली वापस लौटे थे. इसी दौरान सीआईएसएफ के ऑफिस से लौटते हुए संजय एक सड़क हादसे का शिकार हो गए.

घटना के 6 महीने बाद ड्यूटी तो ज्वाइन कर ली, लेकिन साल भर तक अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके. स्पोर्ट्स कोटे में मेडिकल अनफिट होने के बाद सामान्य हेड कांस्टेबल की तरह 2010 तक जॉब करने के बाद रिटायरमेंट ले लिया. 2014 में बच्चों को जूडो सिखाना शुरू किया. इंटरनेशनल खिलाड़ी रहे चुके संजय जोशी के कई छात्र स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप में अपना लोहा मनवा चुके हैं.

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के चुकटी देवरिया के रहने वाले जूडो के इंटरनेशनल खिलाड़ी रहे संजय जोशी ने दिल्ली में रहते हुए 1991 से जूडो की ट्रेनिंग लेकर खेलना शुरू किया. 1992 में स्टेट चैंपियनशिप में भाग लेकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इसके बाद 1993 में स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. जूडो में अच्छे प्रदर्शन के दम पर 1998 में स्पोर्ट्स कोटे से सीआईएसएफ में हेड कांस्टेबल बन गए और फिर सीआईएसएफ के लिए खेलने लगे. 2001 में अफ्रीका में आयोजित इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में सीआईएसएफ की तरफ से खेलते हुए कांस्य पदक हासिल किया.

संजय जोशी ने बताया कि अफ्रीका से लौटने के बाद एक दिन वह सीआईएसएफ के ऑफिस से घर जा रहे थे. इसी दौरान सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसे के बाद तीन महीने कोमा में रहे. स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन कर ली, लेकिन अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाए. जिसके बाद उनके पिता चक्रवर्ती जोशी और सीआईएसएफ के अधिकारियों के कठिन प्रयासों से इंटरनेशनल खिलाड़ी संजय जोशी अपने पैरों पर खड़े तो हो गए, लेकिन स्पोर्ट्स में अनफिट होने के बाद जूडो छोड़कर 2010 तक सामान्य हेड कांस्टेबल की तरह काम करते रहे और फिर 2010 में रिटायरमेंट ले लिया.

संजय ने बताया कि रिटायरमेंट के चार साल बाद एक एकेडमी खोली, जिसमें अब वह हर साल 35 से 40 बच्चों को जूडो की ट्रेनिंग दे रहे हैं. इंटरनेशनल खिलाड़ी रहे संजय जोशी द्वारा तैयार बच्चे विद्यालय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चैम्पियनशिप में मेडल हासिल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मेरा सपना ओलंपिक खेलने का था, लेकिन 2001 में मेरे साथ हुए सड़क हादसे ने मेरी जिंदगी बदल दी. उस एक्सीडेंट ने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था और 2010 में रिटायरमेंट के बाद मैं काफी समय घर में रहा और कुछ समय कम्पनी में काम किया, लेकिन मुझे फिर भी कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. मेरे परिवार और शुभचिंतकों द्वारा मुझे मोटिवेट किया गया और 2014 में मैंने जूडो एकेडमी की शुरुआत की.

इस एकेडमी में बच्चों को नि:शुल्क रूप से जूडो की ट्रेनिंग दे रहा हूं. हर साल 35 से 40 बच्चों को तैयार करता हूं, जो ब्लॉक, स्टेट और नेशनल स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ओलंपिक में मेडल लाने का जो सपना मैंने देखा था, मुझे उम्मीद है मेरा वह सपना जल्द ही मेरे बच्चे पूरा करेंगे.

Tags: Udham Singh Nagar News

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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