
साल 2023 में भारत में चंद्रग्रहण चार महीने बाद देखने को मिला. बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर लोगों ने पूरे चंद्रमा को देखने का लुत्फ उठाया. देखा जाता है कि अलग अलग हालात में चंद्रमा के रंगों में बदलाव आ जाता है. चंद्रमा कभी केवल सफेद, कभी पीला, कभी नीला, कभी गुलाबी तो कभी केसिरया तक जैसा भी नजर आता है. सवाल यह उठता है कि चंद्रमा के रंग का निर्धारण कैसे होता है. क्या पृथ्वी के खास हिस्सों मे ही खास रंग का चंद्रमा दिखाई देता है या फिर किसी चंद्रमा का खास रंग का समय पर ही बनता है. आइए जानते हैं कि इस बारे में क्या कहता है विज्ञान (What does Science Say)?
अलग अलग रंगों का मिश्रण
सामान्य तौर पर चंद्रमा चांदी के रंग में कुछ हल्का भूरा रंग मिले हुआ दिखाई देता है. लेकिन चंद्रमा कई तरह के शेड्स में दिखाई देता है जिससे वह कभी पूरी तरह से चमकीला चांदी का, कभी हलका नीला तो कभी केसरिया, पीला, आदि रंग में दिखता है. इसकी वजह में अलग अलग कोणों से सूर्य से चंद्रमा पर पड़ने वाला प्रतिबिम्बित प्रकाश का पृथ्वी तक आना तो है ही, साथ ही पृथ्वी का वायुमंडल तक भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है.
अंतरिक्ष से एक ही रंग का दिखता है चंद्रमा
नासा भी इस बात को मानता है कि चंद्रमा के अलग अलग रंगों में दिखाई देने के पीछे पृथ्वी का ही वायुमंडल ज्यादा बड़ा कारण है. नासा का कहना है कि चंद्रमा अंतरिक्ष में से कत्थई रंग की मिलावट वाला भूरे रंग का दिखाई देता है. पृथ्वी का वायुमंडल का इस पर बहुत सारे असर डालता है जिससे चंद्रमा अलग अलग रंगों का दिखाई देता है.
लाल-पीले रंग का क्या मतलब?
नासा का कहना है कि जब चंद्रमा लाल रंग का या फिर पीले रंग का दिखाई दे तो इसका एक ही मतलब होता है कि वह उस समय क्षितिज पर दिख रहा है. ऐसा इसलिए होता है कि नीला रंग वायुमंडल में लंबी दूरी तय करते समय बिखर जाता है जिससे रोशनी के सफेद रंग मिले हुए अन्य रंगों में से वह गायब होकर चंद्रमा को लालिमा या पीलापन का अहसास दे देता है.
नीले रंग का कारण
लेकिन कई बार चंद्रमा नीले रंग का भी दिखाई देता है जो की बहुत ही सामान्य बात नहीं है. जब वायुमंडल में धूल के कण ज्यादा होते हैं चंद्रमा आसामान को ही चमकीला बना देता है. ऐसा होता है तब नीले स्पैक्ट्रम से नीला प्रकाश पृथ्वी की सतह पर बिना बिखरे ही सीधा चला आता है और धूल के कारण सफेद रंग में नीलिमा ज्यादा दिखाई पड़ती है.
और भी रंग
दिलचस्प बात यह है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि चंद्रमा बैंगनी रंग का क्यों दिखाई देता है. नासा का मानना है कि इसकी वजह कई प्रभावों का मिश्रण हो सकती है. लेकि इसके मूल में चंद्रमा से प्रतिबिम्बित होने वाली अलग अलग तरह से इसके अलावा बहुत कम लोग जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के समय भी चंद्रमा के रंगों में भारी बदलाव देखने को मिलते हैं. जिनकी वजह पृथ्वी का वायुमंडल नहीं होता है.
ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|
Tags: Earth, Moon, Research, Science, Space
FIRST PUBLISHED : May 06, 2023, 15:55 IST








