मेरठ का चर्चित ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड मामला, मुस्कान और साहिल ने फांसी की सजा को हाईकोर्ट में दी चुनौती

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रिपोर्ट : मनीष वर्मा

इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी खबर,

 

प्रयागराज : मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत (नीला ड्रम) हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने अब इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए 168 पन्नों की अपील दाखिल की है। अपील में दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को रद्द करने के साथ-साथ संबंधित आरोपों से बरी किए जाने की मांग की गई है।

मेरठ के बहुचर्चित ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा सबूत मिटाने से संबंधित अपराध में भी सजा सुनाई गई थी। अब दोनों दोषियों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अपील में 30 सितंबर के दोषसिद्धि आदेश और 14 अक्टूबर के सजा संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है।

मुस्कान और साहिल की ओर से दाखिल अपील में दावा किया गया है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। बचाव पक्ष का तर्क है कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का मूल्यांकन करते समय स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की।

अपील में हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभास का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही, बचाव पक्ष ने खरीद से संबंधित वैध रसीदें और सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किए जाने को भी अपने तर्कों का आधार बनाया है। हालांकि, ये सभी दलीलें अपीलकर्ताओं की ओर से पेश की गई हैं, जिन पर हाईकोर्ट में न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।

मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखा गया था और उसे सीमेंट-कंक्रीट से बंद कर दिया गया था। घटना सामने आने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। पुलिस ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था।

दोनों की ओर से दाखिल अपील में वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चंदेल और संदीप कुमार दुबे के नाम शामिल हैं। अपील में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों से बरी किए जाने की भी मांग की गई है।

अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष अपील पर होने वाली सुनवाई अहम होगी। हाईकोर्ट में अपील दाखिल होने से ट्रायल कोर्ट का फैसला स्वतः निरस्त नहीं होता। दोषसिद्धि और मृत्युदंड के खिलाफ उठाए गए तर्कों पर अदालत का निर्णय आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगा।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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