कौशाम्बी– मनौरी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 14 लोगों की मौत के बाद अब पूरे जिले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। जिले की तीनों तहसीलों में पटाखा बनाने, बेचने और भंडारण करने वालों के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
मनौरी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले की आरोपी कहकशा के मूरतगंज स्थित पटाखा गोदाम पर भी पुलिस ने कार्रवाई की। गोदाम के आगे और पीछे बने कमरों को खुलवाकर पुलिस ने तलाशी ली और वहां रखे पटाखों को जब्त किया जा रहा है। बरामद पटाखों को नियमानुसार सुरक्षित तरीके से नष्ट कराया जाएगा।
हादसे के बाद कौशाम्बी के मंझनपुर, सिराथू और चायल तहसील क्षेत्रों में पुलिस लगातार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही है। पटाखा बनाने और बेचने वालों की जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मनौरी हादसे से पहले जिले में पटाखों के अवैध कारोबार और बारूद के भंडारण पर निगरानी क्यों नहीं थी? इतनी बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे जिले में आखिर कहां से पहुंचते हैं? इन्हें कौन सप्लाई करता है और बिना पर्याप्त जांच के इनका भंडारण कैसे होता रहा?
मनौरी हादसे में 14 लोगों की जान जाने के बाद जिस तेजी से पूरे जिले में छापेमारी हो रही है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा था?
अब कार्रवाई सिर्फ पटाखे जब्त करने तक सीमित न रहकर बारूद की सप्लाई और अवैध पटाखा कारोबार के पूरे नेटवर्क की जांच तक पहुंचनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि जिले में विस्फोटक सामग्री आखिर कहां से आती है और अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।









