कौशांबी
बौद्ध सम्मेलन मे छलका सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का दर्द: बोले-ये लोग हजारो साल से देश के आदिवासी-गरीब-मजलूम-असहाय पर हमला करते आए है
,बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिये जाने का किया स्वागत
समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार को मंझनपुर कस्बे मे बौद्ध सम्मेलन मे हिस्सा लिया। कार्यक्रम मे आने से पहले सपा नेता की गाड़ी पर हिन्दू जागरण मंच के नेताओ व कार्यकर्ताओ ने प्रदर्शन कर काले झंडे दिखाये। जिसके दर्द सपा नेता ने अपने मंच के जरिये आम जनमानस के सामने रखा। सपा नेता ने कहा, उन पर हमला होना कोई नहीं बात नहीं है। ये लोग हजारो हज़ार साल से देश के आदिवासी गरीब मजलूम असहाय एवं दलित समाज पर हमला कर पत्थर फेकते आए है।
जनसभा को संबोधित कर रहे सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, हमला करना उनकी आदत मे है,वह मानवतावादी लोग है। हम हमला करने वाले लोगो को माफ कर देते है। हमारी संस्कृति है कि आगे बढ़ो जो सामने आए उसको गले लगाओ। जो ईंट पत्थर भेजे उसका भी स्वागत करो। इतिहास भरा पड़ा है कि हो महापुरुष आगे बढ़ा है ऐसे अराजक तत्व उस पर रोड़े बाज़ी करते रहे विरोध करते रहे। समय पर कीचड़ उछालते रहे गंदा भी फेका, काला झण्डा भी दिखते रहे, पत्थर भी फेंकते रहे। उनको सद्बुद्धि आए वह ऐसी कामना करते है। वह भी इंसानियत और मानवता के रास्ते चले।
पूर्व मंत्री व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंच से तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य पर विवादित बयान देते हुए कहा कि रामभद्राचार्य जीवन और मृत्यु से जूझ रहे है, उनको राम मंदिर जाना चाहिए था ताकि उनका वह इलाज हो जाता। भगवान राम की उन पर कृपा हो जाती। लेकिन उन्हे अस्पताल ले जाया गया। इसका मतलब विज्ञान सच है और विज्ञान की ताकत मे उनको भी जाना पड़ा। अगर राम के अंदर वो ताकत होती तो विज्ञान मे है तो वह विज्ञान के पास न जाकर राम के पास जरूर गए होते।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, सरकार को समझ बहुत देर मे आई। रामलला मंदिर आंदोलन के नायक लाल कृष्ण आडवाणी को आमंत्रित नहीं किया गया। शायद उसी भूल को सुधारने के लिए भारत सरकार ने लाल कृष्ण आडवाणी को उपाधि देने का फैसला किया है। भारत सरकारी ने भले ही लाल कृष्ण आडवाणी को प्रायश्चित स्वरूप भारत रत्न देने के फैसले का वह स्वागत करते है।






