
हिना आज़मी/देहरादून: हेपेटाइटिस जैसी कई भयंकर बीमारियां मरीजों को हो जाती हैं और उन्हें इसके लक्षण तक नहीं नजर आते. जिस कारण यह सीरियस स्टेज तक पहुंच जाता है. यह बीमारी इंसान की लीवर पर बुरा प्रभाव डालती है. जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे लीवर में संक्रमण फैलता जाता है. कई बार तो लीवर कैंसर या लीवर फेलियर जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं. इस भयंकर बीमारी से लोगों को बचाने के लिए केंद्र सरकार के आदेश के बाद राजधानी देहरादून के दून अस्पताल में आदर्श उपचार केंद्र बनाया गया है, जहां हफ्ते में दो दिन इस बीमारी से जुड़े मरीजों को देखा जा रहा है.
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यूसुफ रिजवी ने जानकारी देते हुए कहा कि- हेपेटाइटिस जो लीवर संबंधी रोग होता है. यह तीन तरह का होता है, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी. ये बीमारी अलग-अलग वायरल इंफेक्शन के कारण होती है. उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर हेपेटाइटिस सी रोग से ग्रसित रोगियों के मामले ज्यादा देहरादून और हरिद्वार में देखे जाते हैं. इतना ही नहीं पूरे देश में हेपेटाइटिस सी का प्रकोप बढ़ गया है, जिसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया है, जिसमें हर राज्य में नोडल सेंटर बनाए गए हैं.
उत्तराखंड में बनाए गए दो नोडल सेंटर
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में दो नोडल सेंटर बनाए गए हैं, जिनमें से एक गढ़वाल क्षेत्र के लिए देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में आदर्श उपचार केंद्र बनाया गया है और दूसरा उपचार केंद्र कुमाऊं क्षेत्र के लिए हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में बनाया गया है. जो डॉक्टर व स्टाफ हेपेटाइटिस के इलाज में काम कर रहे हैं, उन्हें ट्रेनिंग दी गई है.
हेपेटाइटिस ले लेता है भयावह रूप
डॉ रिजवी बताते हैं कि- हेपेटाइटिस सी का समय पर इलाज कराने पर यह खत्म हो सकती है. इसका ट्रीटमेंट करीब तीन महीने तक चलता है. उन्होंने आगे ये भी बताया कि- समय पर इलाज न मिलने के चलते हेपेटाइटिस की बीमारी भयावह रूप ले सकती है. जिसमें बार-बार जौंडिस तो कई बार लीवर फेलियर और लीवर कैंसर जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है. यहां तक की लिवर ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ जाती है, जो काफी खर्चीला होता है.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 12:02 IST






