तो ये थे रानी लक्ष्मीबाई के बचपन के दोस्त, आप भी जानना चाहेंगे इन के बारे में

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विजय राठौड़/ग्वालियर. बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी. बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी. शायद ही कोई ऐसा हो जिसने इन पंक्तियों के ना पढ़ा हो, लेकिन क्या कभी आपने इन हथियारों को देखा है जो कभी रानी लक्ष्मीबाई के दोस्त हुआ करते थे. यदि नहीं तो ग्वालियर में आप इन हथियारों को देख सकते हैं. इन हथियारों को ग्वालियर के नगरनिगम संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है.

असिस्टेंट नोडल अधिकारी प्रमेश ने बताया कि नगरनिगम संग्रहालय में तात्या टोपे और महारानी लक्ष्मी बाई के हथियारों को सभी के लिए प्रदर्शित किया गया. जिनमें महारानी लक्ष्मीबाई की ढाल, कृपाण, कटार, तलवार, बरछी, कवच, नालदार बंदूक, दस्ताने सहित 28 प्रकार के हथियारों को प्रदर्शित किए गए हैं. इसके अलावा तात्या टोपे के विभिन्न प्रकार के भाले, कई प्रकार कि प्राचीन रिवालवर, तोप, बंदूके, स्टेंडदार बंदूकें, तलवारें इत्यादि हथियारों को प्रदर्शित किया गया है. जब भी लोग इन हथियारों को देखा करते है तो ही सोच में डूब जाते है कि क्या सच में इस समय के लोग इस तरह के हथियारों का यूज युद्ध ले लिए करते थे.

युद्ध के दौरान ग्वालियर में ही त्यागे प्राण
ग्वालियर नगर निगम के इस संग्रहालय में और भी प्राचीन वस्तुएं मौजूद हैं. जिनके दीदार के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. इतना ही नहीं इन सभी वस्तुओं को देखने के लिए विदेशों से भी लोग आते है. गौरतलब है कि 1857 में रानी लक्ष्मीबाई युद्ध करते करते ग्वालियर आ गई थी. और युद्ध करते हुए वह ग्वालियर में ही शहीद हो गई थी. जिनकी समाधि आज भी ग्वालियर में गंगादास की बड़ी शाला के समीप बनी हुई है. जिस पर रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. जिनमे बड़ी संख्या में लोग शामिल भी होते हैं.

Tags: Gwalior news, History, Local18, Madhya pradesh news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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