यहां माता पार्वती ने किया था 60 हजार साल इंतजार… ऋषि कब्जा मृग से जुड़ी है कहानी, जानें मंदिर का रोचक इतिहास


ईशा बिरोरिया/ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां हर साल हजारों की संख्या में लोग मंदिरों में देवी- देवताओं के दर्शन करने आते हैं. यहां स्थापित हर मंदिर का अपना-अपना इतिहास और महत्व है. वहीं ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर स्थित गौरी शंकर महादेव मंदिर (Gauri Shankar Mahadev Temple Rishikesh) का भी अपना एक रोचक इतिहास है. ऋषिकेश आने वाले सभी पर्यटक विशेष रुप से इस मंदिर के दर्शन अवश्य करते हैं.

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट के पास स्थित गौरी शंकर मंदिर काफी प्राचीन और पूजनीय मंदिर है. लोकल 18 के साथ हुई बातचीत में मंदिर के महंत श्री गोपाल गिरी जी बताते हैं कि- यह मंदिर ऋषि कुब्जा मृग की कुटिया से लगकर बना हुआ है. ऋषिकेश घूमने आने वाले सभी पर्यटक विशेष रूप से इस मंदिर के दर्शन करते हैं. यहां स्थापित माता पार्वती की मूर्ति प्राचीन है, जिसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी.

गौरी शंकर मंदिर का इतिहास
गोपाल गिरी बताते हैं कि-इस मंदिर का एक रोचक इतिहास है. मान्यता है कि जब माता पार्वती ने यमुना को ऋषि कुब्जा मृग के साथ जाने का आदेश दिया, तो यमुना ऋषि कुब्जा मृग के कमंडल में समाकर उनकी कुटिया में आ गईं. जिसके बाद ऋषि तप करने के लिए बैठ गए. मां पार्वती ने देखा कि यमुना नदी पूरी सूखी पड़ी है. वह ऋषि के निवास स्थान गईं, जहां ऋषि तप में लीन थे. यह देख मां पार्वती ने उनके तप से उठने का इंतजार किया. मां पार्वती ने कुटिया के पास ही करीब 60,000 वर्ष ऋषि का तप पूर्ण होने का इंतजार किया. ऋषि का तप पूर्ण होते ही मां पार्वती ने यमुना को वापस से उनके स्थान पर भेज दिया. जिसके बाद इस स्थान पर गौरी शंकर मंदिर का निर्माण किया गया.

कहां स्थित है मंदिर ?
अगर आप भी ऋषिकेश घूमने आए हुए हैं या आने की सोच रहे हैं तो यहां त्रिवेणी घाट पर स्थित मंदिर में माता के दर्शन जरूर करें. इस मंदिर के साथ ही आपको ऋषि कब्जा मृग की कुटिया के दर्शन भी हो जाएंगे.

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Author: Jagran Times

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