
हाइलाइट्स
अशनीर का कहना है कि तेजी से प्रतिक्रिया जो दे वो ही शार्क है.
उनका कहना है एपिसोड के प्रसारण से पहले ही डील होनी चाहिए पूरी.
एक साल तक डील के लटके रहने को उन्होंने बताया खतरनाक.
नई दिल्ली. भारतपे को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) ने शार्क टैंक इंडिया-2 (Shark Tank India-2) के जजों पर तीखा हमला बोला है. शो में डील पक्की करने के बावजूद शार्क्स द्वारा पिचर्स के साथ सौदा पूरा करने में देरी करने और टालमटोल वाला रवैया अपनाने पर अशनीर शार्क्स पर भड़के हैं. ग्रोवर ने यहां तक कह दिया है कि इस इतनी लेटलतीफी अगर शार्क्स कर रहे हैं, तो उन्हें शार्क नहीं डॉल्फिन कहना चाहिए. शार्क्स इसलिए शार्क हैं क्यों वे फटाफट फैसला लेते हैं और मछलियों यानी पिचर को प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं देते.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शार्क टैंक इंडिया सीजन 2 में डील हासिल करने वाले कई फाउंडर्स ने आरोप लगाया है कि शार्क डील करने में देरी कर रहे हैं. 12 फाउंडर्स ने मनीकंट्रोल को बताया है कि उनमें से किसी को फंड नहीं मिला है. शार्क नियमों और वैल्यूएशन को लेकर मोलभाव कर रहे हैं. इससे डील होने में ज्यादा समय लग रहा है और कुछ डील तो सिरे ही नहीं चढ़ सकी. शार्क टैंक के दूसरे सीजन के एक कंटेस्टेंट यानी फाउंडर ने शो के एक जज यानी शार्क और शादीडॉटकॉम के फाउंडर अनुपम मित्तल से एक डील हासिल की. लेकिन 10 महीने के बाद पहले से तय फंडामेंटल्स को लेकर मतभेद हो गए और उनके कारोबार को कमजोर बता दिया गया.
ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ एक फाउंडर के साथ हुआ है बल्कि कई फाउंडर्स ने इसकी शिकायत की है कि शार्क उस एपिसोड जिसमें इसका प्रसारण हुआ था, उसके ऑनलाइन ट्रैफिक, ऑडिएंस रिस्पांस इत्यादि के आधार पर डील की फिर से समीक्षा करते हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि फाउंडर्स और शार्क के बीच डील आगे नहीं बढ़ती है और कुछ कंटेस्टेंट की यह शिकायत है कि उनका कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गया है.
देरी पर भड़के अशनीर
शो के जज और शादीडॉटकॉम के फाउंडर अनुपम मित्तल का कहना है कि शो के दौरान की गई डील के पूरा होने में आमतौर पर एक साल लग जाता है. यह बात अशनीर को जमी नहीं है. उनका कहना है कि किसी भी फाउंडर या बिजनेस के लिए डील पूरी होने में एक साल का समय बहुत ज्यादा है. फाउंडर ही नहीं, शार्क भी किसी सौदे के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं कर करते. यह कारोबार के लिए अनुचित है. इसी को लेकर अशनीर ने शार्क या डॉल्फिन का उदाहरण दिया कि जल्द फैसले लेत हैं तो जज शार्क हैं और अगर वे इसमें असफल रहते हैं तो फिर डॉल्फिन हैं.
एपिसोड प्रसारित होने से पहले मिले पैसा
अशनीर ग्रोवर का कहना है कि पैसा फाउंडर को देने की डील है, वह उस फाउंडर का एपिसोड प्रसारित होने से पहले उसे मिल जाना चाहिए. इससे वे शो प्रसारित होने के बाद जो मांग बढ़ेगी, उसका फायदा उठा सकेंगे. ग्रोवर ने अपना उदाहरण दिया कि शार्क टैंक के पहले सीजन में उन्होंने ने जितने डील किए थे, उसमें से 55-60 फीसदी पूरे किए.
मित्तल ने बताया, क्यों लगता है टाइम
अनुपम मित्तल का कहना है कि फाउंडर्स को डील को लेकर शो एयर होने के बाद थोड़ा इंतजार करना चाहिए ताकि वे देख सकते हैं कि क्या वे बाजार से और बेहतर ऑफर हासिल कर सकते हैं? मित्तल का कहना है कि कुछ नए फाउंडर्स को कभी-कभी फंडिंग राउंड के प्रोसेस की भी जानकारी नहीं होती है. कुछ ने प्रोप्रॉयटरशिप्स या पार्टनरशिप्स शुरू की है और अब उन्होंने कंपनी रजिस्टर कराने की प्रक्रिया शुरू की है जिसमें महीनों लग जाते हैं. कुछ ने कभी शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट पहले कभी देखा नहीं है और न ही वे कभी डीडी (ड्यूडिलीजेंस) प्रोसेस से गुजरे हैं. अनुपम के मुताबिक, इन सभी बेसिक कामों जैसे, अकाउटेंट हायर करने और बेसिक गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करने में फाउंडर्स की मदद की जाती है. अनुपम के मुताबिक, इन सबके कारण वक्त लगता है.
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Tags: Boat, Business news in hindi, Tv show
FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 11:08 IST






