
मनमोहन सेजू/बाड़मेर. कहते हैं कि मां अपने बेटे के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देती है, लेकिन एक बच्चे को पिता के साथ के चलते मां का बलिदान नजर नहीं आता है. इन सबसे उलट भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बाड़मेर के एक गांव के बच्चे ने अपने पिता की मौत के बाद मां को मनरेगा में मजदूरी करते देखा. यही नहीं, उसने अपनी पढ़ाई को पूरा करते हुए मां की मेहनत, त्याग और समर्पण पर अपनी सफलता की मुहर लगा दी है.
बाड़मेर जिले के छोटे से गांव सरणू पणजी के महादेव ने अपनी मां के चरणों मे डॉक्टर बनने की सफलता का श्रेय रखकर उनकी अब तक की मेहनत को मंजिल पर पहुंचा दिया है. दरअसल सरणू पणजी निवासी महादेव शुरुआत से ही मेधावी छात्र था, लेकिन मुश्किल हालातों के बावजूद महादेव ने हार नहीं मानी और नीट परीक्षा को पास कर लिया है. महादेव ने दसवीं में 83.33 फीसदी और बारहवीं में 96.80 फीसदी अंक हासिल किए थे. जबकि नीट में उसने 665 अंक हासिल कर ऑल इंडिया में 3629वीं और ओबीसी कैटेगरी में 1166वीं रैंक हासिल की है.
साल 2006 में पिता की मौत, फिर…
साल 2006 में महादेव के पिता का सड़क दुर्घटना में निधन होने के बाद घर की जिम्मेदारी उसकी माता कमला देवी पर आ गई थी. चार भाई-बहनों के लालन पालन के लिए कमला देवी ने मनरेगा में मजदूरी कर घर का गुजारा चलाया. अब महादेव डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करेगा. महादेव ने दूसरे प्रयास में ही नीट परीक्षा पास करते हुए डॉक्टर बनने का सपना साकार किया है.
गांव का पहला डॉक्टर बनेगा किसान का बेटा, तीसरे प्रयास में नीट में मारी बाजी, ये हैं सक्सेस मंत्र
महादेव ने बताया कि साल 2006 में पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक हालात बद से बदतर होते चले गए. मां ने मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया और अब दूसरे प्रयास में ही नीट परीक्षा को पास किया है. साथ ही बताया कि इस दौरान कई मुश्किलें आईं, लेकिन उनकी मां ने हिम्मत नहीं हारी. यही वजह है कि आज में नीट पास कर पाया हूं.
.
Tags: Barmer news, Local18, NEET UG 2023, Success Story
FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 09:20 IST






