Weird Food:यहां पेशाब में उबाले जाते अंडे, बड़े चाव से खाते हैं लोग, बताते सेहत के लिए फायदेमंद

उबला अंडा खाना हमारे लिए कोई नई बात नहीं. दुनिया में आप जहां भी जाएं, लगभग हर जगह अंडे को पानी में उबालकर खाया जाता है, लेकिन चीन इसका अपवाद है. चीन के एक शहर में अंडों को पानी में नहीं बल्कि पेशाब में उबाला जाता है. लोग इन्‍हें बड़े चाव से खाते हैं. उनके मुताबिक, ऐसे अंडे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं और आपको कभी बीमार नहीं पड़ने देते. कभी धूप नहीं लगती.

अजीबोगरीब फूड का जिक्र हो तो चीनी लोगों का कोई जवाब नहीं. यहां के लोग हर साल 40 लाख बिल्‍ल‍ियां खा जाते हैं. लेकिन इसी चीन में एक और ड‍िश की इन दिनों चर्चा हो रही है, जिसकी रेसिपी आपको हैरान कर देगी. चीन में लोग वर्जिन अंडे खाते हैं. आप सोच रहे होंगे कि अंडा और वर्जिन क्या होता है. लेकिन स्‍थानीय लोगों का कहना है कि इसे खाने से कभी लू नहीं लगेगी. ब्‍लड प्रेशर हमेशा सही रहेगा. शरीर को एनर्जी मिलेगी.काफी सुगंध‍ित होते हैं. ज्‍यादातर पर‍िवारों के लोग इसे खाना पसंद करते हैं.

इस तरह बनाई जाती रेसिपी
वर्जिन अंडा कोई दूसरा अंडा नहीं है. यह एक तरह से सामान्‍य अंडा ही होता है. लेकिन इसका नाम इसे बनाने की विधि के कारण पड़ा. इस वर्जिन अंडे को बनाने के लिए मूत्र का उपयोग किया जाता है. इन अंडों को स्कूल जाने वाले बच्चों के पेशाब में उबाला जाता है. इस व्यंजन को स्थानीय तौर पर ताउंगजी डान कहा जाता है. कुछ लोग इसे बॉय एग के नाम से भी जानते हैं. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्जिन बनाने के लिए पहले छोटे बच्चों के पेशाब में अंडों को डुबोया जाता है. फिर उन्हें इसमें उबाला जाता है. फिर छिलके उतार दिए जाते हैं और उन्हें वापस उबलते मूत्र में डुबो दिया जाता है, ताकि अंडे को मूत्र का स्वाद मिल जाए. पूरे दिन मांचा की आग पर अंडे पकाये जाते हैं.

यहां से लाया जाता इतना मूत्र
अब इतना मूत्र लाने की बात कहां से आती है. इसलिए यहां स्कूलों में बाल्टियां रखी जाती हैं. स्कूली छात्र शौचालय की बजाय इन्हीं बाल्टियों में पेशाब करते हैं. ऐसे मूत्र को एकत्रित किया जाता है. यह डिश झेजियांग प्रांत में बहुत मशहूर है. वसंत ऋतु शुरू होते ही वहां के लोग इस व्यंजन को प्रेम से खाते हैं. यहां के लोगों के मुताबिक यह डिश सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है.आप जानकर और भी हैरान होंगे कि यह मूत्र सिर्फ लड़कों का लिया जाता है वह भी 10 साल से कम उम्र वाले लड़कों का. हालांकि, इसके पीछे की वजह नहीं बताई गई है.

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Author: Jagran Times

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