Water Crisis : जीवनदायिनी किऊल नदी का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर,लगातार घटता जा रहा हैं जलस्तर

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 गुलशन कश्यप/जमुई. जिले में जीवनदायिनी कही जाने वाली किउल नदी का अस्तित्व समाप्त होने वाला है. कई जगह से नदी पूरी तरह सूख गई है. जिस नदी में कभी बाढ़ आया करती थी, पिछले एक दशक में उसमें पानी तक नहीं है और अब यह संकट लोगों के लिए एक बड़ा प्रश्न बन गया है. जिले के जलस्तर में भारी अंतर आया है और तापमान भी अगर यही चलता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में जिले का अधिकतम इलाका तापमान के लिहाज से रेगिस्तान नुमा हो जायेगा. दरअसल, भारत के जितने भी रेगिस्तानी इलाके हैं, वहां का तापमान दिन के वक्त 45 डिग्री सेल्सियस तो रातों का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. जमुई में इस साल के तापमान का आकलन करें तो इसमें भी बहुत फर्क आ गया है. जमुई में भी दिन का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तो रात का तापमान 18 से 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है. यानी दिन और रात के तापमान में 20 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर आ गया है. जबकि पहले यह अंतर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक का हुआ करता था.

जिले के सबसे प्रमुख किउल नदी, चकाई प्रखंड के पतरो व डढ़वा नदी, अजय नदी, खैरा प्रखंड से निकलने वाली भारोटोली नदी, बुनबुनी नदी, सोनो प्रखंड से गुजरने वाली बरनार और सुखनर नदी, गिद्धौर से गुजरने वाली उलाई नदी भी पानी के अभाव में विलीन हो गई है. जिले में औसत जलस्तर 32.5 फीट पर पहुंच गया है. अगर जिले की बात करें तो भूजल का स्तर बरहट में 32.1 फीट, चकाई में 35.10 फीट, गिद्धौर में 35.3 इंच, अलीगंज में 32.2 फीट, जमुई में 27.8 फीट, झाझा में 35 फीट, खैरा में 33.10 फीट, लक्ष्मीपुर में 33.7 फीट, सिकंदरा में 29.2 फीट तथा सोनो में 29.1 फीट ही बचा है.

अवैध खनन पर कसी जा रही है नकेल
जिला खनन पदाधिकारी गोपाल साव ने बताया कि नदियों की खुदाई पर नजर रखने के लिए खनन विभाग के कर्मी लगातार कार्यरत हैं. इसके अलावा जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से भी लगातार इसे नियंत्रित रखा जा रहा है. रात के अंधेरे में अगर कोई गलत खनन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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