PHOTOS: मिस्र की ऐतिहासिक अल-हाकिम मस्जिद, PM मोदी करेंगे दौरा, भारत से है कनेक्शन


अल-हाकिम मस्जिद मिस्र की राजधानी ओल्ड काइरो में स्थित बाब अल-फ़ुतुह के बगल में स्थित है. साल 990 में फातिमी ख़लीफ़ा अल-अज़ीज़ बी-इलाह निज़ार ने इसकी नींव रखी और साल 1013 में उनके बेटे अल-हकीम के शासनकाल के दौरान पूरा किया गया था. इसकी बनावट इब्न तुलुन की मस्जिद के समान है. (Photo-@Cairogram)

अल-हाकिम मस्जिद की इमारत ईटों से बनी हुई है, जिसमें चार इवानों से घिरे दो आंगन हैं. वहीं, मस्जिद के चारों ओर बने दिवार काफी सुसज्जित ईटों से हुई है. ये मिस्र में बने हर मस्जिद की खासियत है. वहीं, मस्जिद के मीनारों के शाफ़्ट और मेहराब के अंदरूनी हिस्सों को कूफ़ीक लिपि से लिख कर सजाया गया है. (Photo-egypttimetravel.com) आयताकार रूप से बने इस मस्जिद का आकार 120.78 मीटर x 113.01 मीटर है. वर्गाकार आधार से उठते हुए इनके मीनार इस आयताकार मस्जिद से काफी उठे हुए होते हैं, इन मीनारों को तराशे गए पत्थरों से बनाया गया है. इस मस्जिद की मीनारें उतर और पश्चिम दिशा से उठी हुई होती हैं. इन मीनारों की आकार अष्टकोणीय हैं, जो एक रिब्ड गुंबद से ढकी हैं. मिहराब की दीवार के दोनों सिरों पर दो गुम्बद हैं. इसके अलावा एक तीसरा गुंबद भी है, जो बाकि गुंबदों से ज्यादा उठा हुआ है, जो कि रिब्बड गुंबद से ढका हुआ है. (Photo-@abdelazeem201) साल 1302 में मिस्र में आये भीषण भूकंप ने इस मस्जिद को काफी तहस नहस कर दिया था. मीनारों के कई मेहराब, आंतरिक खंभे, छत और ऊपरी हिस्से ढह गए थे. फिर बाद में ल्तान कलावुन द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया. मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर के शिलालेख के अनुसार, अमीर मुहम्मद बिबर ने जीर्णोद्धार का संचालन किया. सुल्तान हसन के शासनकाल के दौरान, 1358-1359 में मस्जिद को फिर से बहाल किया गया. (Photo-egymonuments.gov.eg) साल 1808 में, अस-सैय्यद उमर मकरम द्वारा इस मस्जिद के पूर्वी इवान में एक बरामदा जो भव्य स्तंभों के साथ होता है, जिसे पोर्टको कहा जाता है, का निर्माण करवाया. वहीं, उन्होंने मस्जिदों के मीनारों के गुंबदों को संगमरमर से ढक दिया और एक पुलपिट भी रखवाया. वहीं, साल 1927 में अरबी स्मारकों के संरक्षण के लिए प्रशासन ने पोर्टिको के दक्षिण-पश्चिम भाग के पियर्स और मेहराब को बहाल किया था और आंगन और मिहराब के बीच चलने वाले हॉल का पुनर्निर्माण किया था. (Photo-egymonuments.gov.eg) यह मस्जिद मिस्र का चौथा सबसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण परिसर है. इसके बनावट का संयोजन मिस्र के सबसे प्रमुख इब्न तुलुन मस्जिद और अल-अजहर मस्जिद से है. यहां पहुंच कर पीएम मोदी इस्लमिक देशों की धार्मिक मन्यताओं में सहभागिता की प्रस्तुति देंगे. (Photo- egymonuments.gov.eg) इस मस्जिद को नेपोलियन से भी जोड़ा जाता है ऐसा मान्यता है कि नेपोलियन ने से एक किले के रूप में इस्तेमाल किया था. जबकि कालन्तर में इसका इस्तेमाल एक स्कूल के रूप में किया गया. लेकिन अंततोगत्वा इसे मस्जिद में बदला गया. हालांकि, यहां पीएम मोदी के जाने का एक कारण और भी है जो कि एक छोटे से इस्माइली संप्रदाय के प्रमुख सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन से जोड़ा जाता है. मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने अद्भुत अल-हाकिम मस्जिद के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया है. (Photo-egymonuments.gov.eg)

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Author: Jagran Times

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