JEE Advanced Result 2023 : रांची के साबिर की आई 188वीं रैंक, जानें कितने घंटे की सेल्फ स्टडी ने दिलाई सफलता

शिखा श्रेया/रांची. रविवार की शाम जेईई एडवांस 2023 का रिजल्ट घोषित किया गया. जिसके बाद रांची के साबिर अहमद ऑल ओवर इंडिया 188 रैंक लाकर रांची जिला के सेकंड टॉपर बने है. साबिर रांची के मेकॉन स्थित जेवीएम श्यामली के छात्र है व लालपुर स्थित फ़िटजी से कोचिंग ली है. सफलता मिलने के बाद साबिर ने कहा यह सफलता उनके साथ-साथ उनके टीचर व परिवार का है. उनके सहयोग के बिना यह असंभव था.

साबिर ने लोकल 18 से खास बातचीत की और बताया आईआईटी में जाना हमेशा से मेरा सपना था.इस दौरान मेरी मां का बेहद सपोर्ट रहा. 2017 में मेरे पिताजी का देहांत हो गया. जिसके बाद मेरी मां ने अकेले मेरी देखभाल की है. मेरी पढ़ाई से लेकर मेरे खाने-पीने व मेरी एक एक चीज को मेरी मां ने संभाला है.उनका सहयोग मेरे लिए महत्वपूर्ण रहा है. इसके अलावा घर में दादा दादी व बड़े पापा का बहुत सहयोग रहा. कोचिंग के अध्यापकों ने पढ़ाई के अलावा हमेशा मोरल सपोर्ट दिया.जिस वजह से हमेशा तनाव मुक्त रहकर पढ़ाई करने में मदद मिली.

हर दिन 10 से 12 घंटे की पढ़ाई होती थी
साबिर बताते हैं, कोचिंग मिलाकर हर दिन 10 से 12 घंटे की पढ़ाई हो जाती थी. सेल्फ स्टडी 6 से 7 घंटे घर पर करता था व कोचिंग में 4 घंटे की पढ़ाई होती थी. पढ़ाई के दौरान घड़ी देखने का फुर्सत नहीं होता था व घड़ी देखकर कभी पढ़ाई नहीं की. क्योंकि जब आप समझ कर और अपने इंटरेस्ट के साथ पढ़ना शुरू करते हैं तो फिर समय का पता ही नहीं चलता.

आगे बताते हैं, पढ़ाई के दौरान हर सब्जेक्ट पर बराबर फोकस रखना होता है.ऐसा नहीं कि किसी सब्जेक्ट में ज्यादा इंटरेस्ट है तो उस पर ज्यादा ध्यान व किसी अन्य पर कम ध्यान देना हैं.हर सब्जेक्ट अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. मैंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स तीनों को बराबर समय दिया.साथी हर दिन अपना टाइम टेबल बना लिया करता था.उसी को पूरी डेडिकेशन के साथ फॉलो करता था.

म्यूजिक व फुटबॉल से दूर करते थे स्ट्रेस
साबिर बताते हैं, यह सफर काफी लंबा होता है और स्ट्रेस होना लाजमी है.लेकिन इस दौरान मैं हर दिन कुछ समय के लिए म्यूजिक सुनता व फुटबॉल खेलने के लिए भी समय निकाला करता था.जिससे स्ट्रेस दूर होता है व पढ़ने में भी मन लगता था.इस दौरान कभी टेस्ट में कम मार्क्स आते तो काफी बुरा लगता था.कई बार तो बैठकर रोता भी था.

लेकिन मम्मी काफी सपोर्ट करती थी. समझाया करती थी कि यह बस एक पड़ाव है. तनाव से अच्छा हम यह देखे कि हमारी गलती कहां हो रही है. उसको दूर करने की कोशिश करें. ऐसे समय में मैं हमेशा अपने परिवार वालों से बात किया करता था, जिससे मन हल्का होता था.

कंसिस्टेंसी के साथ पढ़ाई करें सफलता जरूर मिलेगी
साबिर बताते हैं, इस दौरान कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी होती है. हार्ड वर्क का कोई शॉर्टकट नहीं होता. हर दिन कुछ ना कुछ जरूर पढ़ें. एनसीईआरटी को बिना इग्नोर किए हुए मॉक टेस्ट देते रहें. जिससे आपको अपनी कमी के बारे में पता चले और उसको बिना देर किए सही कर ले. साथी इस दौरान कोई बाहरी मोटिवेशन से अच्छा अपने खुद के भीतर मोटिवेशन तलाशे. आपके अंदर का ही मोटिवेशन आपको सफलता दिलाएगी, बाहरी मोटिवेशन क्षणिक होता है. अंदर का मोटिवेशन आपको काफी आगे तक ले जाता है.

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Author: Jagran Times

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